लखनऊ। एआई आधारित तकनीक से डॉक्टरों को निर्णय लेने में सहायता मिलती है, जिससे गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके अलावा टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट हेल्थकेयर सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और प्रभावी बन रही हैं। ये बातें शुक्रवार को एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी एमिटी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रो. डॉ. सचिन कुमार ने कहीं। वह द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स भवन में स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर हुई कार्यशाला में मौजूद रहे।
डॉ. सचिन ने कहा कई बार डॉक्टर बीमारी को नहीं पकड़ पाते हैं। ऐसी दशा में डॉक्टर जांच लिखते हैं या फिर दवा बदलते हैं। ऐसी स्थिति में बीमारी को पकड़ने में एआई कारगर हो सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईईआई के अध्यक्ष इं. वीपी सिंह ने कहा कि अभियंता और तकनीकी विशेषज्ञ इस क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और रोगियों के बेहतर उपचार के माध्यम से समाज के स्वास्थ्य स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।