लखनऊ। प्रतापगढ़ के मरीज की किडनी में पथरी थी। वह सर्जरी कराने के बजाय दवाएं खाता रहा। लंबे समय तक पथरी न निकलने से किडनी में पस पड़ गया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने लोहिया संस्थान में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने सर्जरी कर एक किडनी निकाल दी।
प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी रामराज (57) मछली पालन करते हैं। उनकी दाहिनी किडनी में पथरी थी। इससे दर्द और पेशाब में मवाद आने की शिकायत हो रही थी। एक माह पहले वह गोमतीनगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की ओपीडी में पहुंचे। यहां यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. ईश्वर राम धयाल ने जांच कराई तो पता चला कि दाहिनी किडनी में चार पथरी थीं। किडनी पूरी तरह से सड़ चुकी थी। डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी।
डॉ. ईश्वर राम धयाल ने बताया कि 13 सितंबर को मरीज को भर्ती कर ऑपरेशन की सड़ चुकी किडनी निकाली गई। किडनी में करीब 500 एमएल पस भरा हुआ था। उन्होंने बताया कि अधिकतर मरीजों की किडनी में 200 एमएल तक पस की समस्या को उन्होंने देखा था। इस मरीज की किडनी में बहुत अधिक पस था। इससे मरीज के दूसरे अंगों पर भी प्रभाव पड़ सकता था।
डॉ. ईश्वर ने बताया कि रामराज ने उन्हें जानकारी दी कि स्थानीय डॉक्टर ने करीब चार सेमी पथरी को निकालने के लिए सर्जरी बताई थी, लेकिन उसने सर्जरी नहीं कराई। ऐसे में वह एक साल तक पथरी गलाने के लिए दवा खाता रहा, मगर पथरी नहीं निकली। कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह ने उन्हें लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। ऑपरेशन के बाद मरीज से मिलने विधायक भी पहुंचे और हाल लिया।