समय पर सटीक फैसला लेकर ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक युवक के शरीर के आर-पार हो गए सरिये को निकाल उसे नया जीवन दिया। हादसे में उसकी छोटी व बड़ी आंत क्षतिग्रस्त हो गई थी।
तीन घंटे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने सरिया निकालने के साथ ही उसकी छोटी व बड़ी आंत को सही किया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
ऑपरेशन कितना जटिल था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन घंटे तक चली सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की पूरी टीम की सांसें भी अटकी हुई थीं।
कैसे हुआ हादसा
अमेठी के जायस में पेट्रोलियम प्लांट में मजदूरी करने वाला अनिल पैर फिसलने से पांचवीं मंजिल से गिर गया। वह निर्माण कार्य के लिए रखे करीब 16 एमएम व्यास वाले सरिये पर जा गिरा।
सरिया उसके पेट के निचले हिस्से से घुसता हुआ पीठ की तरफ से आर-पार हो गया। किसी तरह से साथियों ने सरिया काटा और अनिल को रायबरेली जिला अस्पताल पहुंचाया जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
चुनौतियों से ऐसे पाया पार
बेहोशी : चूंकि अनिल को ऑपरेशन टेबल पर नहीं लिटाया जा सकता था ऐसे में पहली चुनौती उसे बेहोश करने की ही थी। डॉक्टरों ने तुरंत तरकीब निकाली। तीन लोगों ने उसे हवा में ही सपोर्ट किया और बेहोशी के बाद ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
सरिये को निकालना : सबसे बड़ी चुनौती अंगों को कम से कम नुकसान के साथ सरिया बाहर निकालने की थी। सरिये की घुमावटें इसमें बड़ी समस्या थीं। यानी जैसे किसी स्क्रू को खोला जाता है वैसे ही सरिये को निकाला जा सकता था।
डॉक्टरों ने इसके लिए लगभग 10 इंच का चीरा लगाया जिससे पता चल सके कि अंदर चोट कितनी है। किन अंगों को नुकसान पहुंचा। जब सारी स्थिति साफ हुई तो सरिये को घुमा-घुमाकर बाहर निकाला गया।