केजीएमयू में लिवर प्रत्यारोपण के दो दिन बाद बुधवार रात मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। उधर, डॉक्टरों का कहना है कि मरीज लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। प्रत्यारोपण के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। तमाम कोशिशों के बाद भी उसे नहीं बचाया जा सका।
लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मोहनलालगंज के धर्मावत खेड़ा निवासी जितेंद्र रावत का गोमतीनगर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। जांच के बाद डॉक्टरों ने लिवर खराब होने की पुष्टि करते हुए ट्रांसप्लांट की सलाह दी। परिजनों ने इसके लिए केजीएमयू में संपर्क किया।
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21 अप्रैल को केजीएमयू में अंगदान हुआ। डॉक्टरों ने जितेंद्र के परिवारीजनों को फोन कर कैडवरिक लिवर प्रत्यारोपण की बात कही, जिस पर वे राजी हो गए। सोमवार को लिवर प्रत्यारोपण हुआ। हालांकि, इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ गई। भाई उमेश का आरोप है कि जितेंद्र को रक्तस्राव होने लगा था। डॉक्टरों ने इसे रोकने के लिए ऑपरेशन किया फिर वेंटिलेटर पर रखा गया। बुधवार रात जितेंद्र की मौत हो गई। परिजनों ने प्रत्यारोपण में लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया है।
उधर, केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक, मरीज की हालत पहले से बेहद नाजुक थी। क्रिटनिन बढ़ा हुआ था। प्रत्यारोपण में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। परिजनों के आरोप बेबुनियाद हैं।