लखनऊ। पीजीआई की इमरजेंसी में सोमवार सुबह इलाज के लिए पहुंचे 57 वर्षीय मरीज की मौत हो गई। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय शव स्ट्रेचर से गिर गया। सिर में चोट लगने से खून निकलने लगा। यह देख साथ आए परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस और पीजीआई अधिकारियों ने समझाकर मामला शांत कराया।
सुशांत गोल्फ सिटी निवासी विजय वर्मा एक निजी कंपनी में फूड प्रोडक्शन मैनेजर थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। वह अपने 10 वर्षीय बेटे के साथ रहते थे। सोमवार सुबह परिवार की ही सदस्य कुमकुम करीब छह बजे बच्चे को स्कूल भेजने के लिए उठाने गईं। उन्होंने विजय को भी आवाज दी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। पास जाकर देखा तो वह अचेत पड़े थे। उन्हें तत्काल पीजीआई ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां से इमरजेंसी भेज दिया गया।
परिजनों के मुताबिक, सुबह करीब सात बजे विजय को पीजीआई इमरजेंसी लाया गया, लेकिन करीब दो घंटे तक उपचार शुरू नहीं हुआ। करीब नौ बजे स्टाफ बदलने के बाद डॉक्टरों ने जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि मरीज मृत अवस्था में लाया गया था।
मामला संदिग्ध होने के कारण शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा था। इसी दौरान चार वार्ड बॉय शव को स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे, तभी वह नीचे गिर गया। सिर में चोट लगने से खून निकलने लगा। परिजनों ने मांग की कि शव गिरने की घटना को लिखित रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी तरह का भ्रम न रहे।
इंस्पेक्टर पीजीआई सुनील सिंह ने बताया कि परिजन इलाज में देरी और शव गिरने से नाराज थे। मौके पर पहुंचे सीएमएस डॉ. देवेंद्र गुप्ता समेत अधिकारियों ने उन्हें समझाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
मरीज मृत अवस्था में लाया गया था। ईसीजी के बाद उसे मृत घोषित किया गया। शव स्ट्रेचर से गिरने पर सिर में हल्की चोट आई थी। लापरवाही के आरोप बेबुनियाद हैं। - डॉ. देवेंद्र गुप्ता, सीएमएस, पीजीआई
विजय की फाइल फोटो और इसी एंबुलेंस से लाया गया मरीज।