लखनऊ। तत्काल टिकटों में सेंधमारी यात्रियों के लिए मुसीबत बनी हुई है। प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों की मदद से दलाल जनवरी से लेकर अब तक तत्काल कोटे की करीब 18 हजार सीटों पर हाथ साफ कर चुके हैं। इधर, यात्री कन्फर्म टिकटों के लिए परेशान हैं।
मुंबई जाने के लिए असीम ने शुक्रवार को पुष्पक एक्सप्रेस की थर्ड एसी में तत्काल कोटे की सीट के लिए बृहस्पतिवार सुबह प्रयास किया, लेकिन कोटा खुलते ही वेटिंग शुरू हो गई। असीम की तरह तत्काल कोटे की सीट की आस लगाए हजारों यात्रियों को रोजाना मायूसी हाथ लगती है।
दिल्ली जाने वाली लखनऊ मेल, एसी एक्सप्रेस, कैफियात, वैशाली, गोरखधाम, काशी विश्वनाथ सहित अन्य ट्रेनों में तत्काल कोटे में 100 से अधिक सीटें रोजाना खाली दिखती हैं। मुंबई जाने वाली पुष्पक, कुशीनगर, अवध, गोरखपुर एलटीटी आदि ट्रेनों में भी तत्काल की सीटें खाली रहती हैं, जिन पर कोटा खुलने पर दलाल कब्जा कर लेते हैं। जनवरी से लेकर अब तक तत्काल कोटे की 18 हजार सीटें उपलब्ध कराई गईं। इनमें से दस प्रतिशत ही यात्रियों को मिल सकीं।
ऐसे काम करता है प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों
दलाल जिन प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें यात्रियों का विवरण कोटा खुलने से पहले ही भर जाता है। इतना ही नहीं दर्जनभर से अधिक टिकट एक साथ बुक हो जाते हैं। आरपीएफ ने कई दलालों के पास से प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों बरामद किए हैं।