लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी की वाल्मीकि रंगशाला में बुधवार को लोकनाट्य धनुष भंग का आयोजन किया गया। संस्कृति विभाग के सहयोग से अग्रसर संस्था की दिव्य मासिक नाट्य शृंखला के तहत यह दूसरी प्रस्तुति रही। रामकुमार त्रिपाठी ‘निर्द्वन्द’ इसके लेखक हैं और परिकल्पना व निर्देशन संजय त्रिपाठी का रहा। नाटक में परशुराम-लक्ष्मण के रोचक संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
नाटक की शुरुआत मारीच कथा से होती है। इसके बाद विश्वामित्र के आश्रम पर राक्षसों का उत्पात दिखाया जाता है। विश्वामित्र राजा दशरथ से राक्षसों को मार भगाने के लिए राम और लक्ष्मण को साथ लेकर आते हैं। दोनों भाई राक्षसों का संहार करते हैं और इसके बाद विश्मामित्र के साथ सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं। यहां श्रीराम के धनुष भंग करते ही परशुराम पहुंच जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है लक्ष्मण और परशुराम का संवाद, जिसे देखकर दर्शक रोमांच से भर जाते हैं। श्रीराम की ओर से परशुराम का संदेह दूर करने के साथ ही नाटक की समाप्ति हो जाती है। नाटक में राम की भूमिका अक्षत ऋषि, लक्ष्मण ओमकार पुष्कर, सीता सृष्टि शुक्ला और परशुराम की भूमिका संजय त्रिपाठी ने निभाई।