सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी पीने का पानी, खेती की जमीन, विद्यालय, सड़क व बिजली से ग्रामवासी वंचित हैं। व्यवस्था कागजों में तक पहुंचती दिखती है लेकिन वो जमीन पर उतनी प्रभावी नहीं है।
सम्मेलन के दौरान एकल अभियान ने संकल्प कराया कि प्रत्येक गांव के 10 युवक और 10 युवतियों को ग्राम स्वराज सेनानी बनाकर उनके खुद के गांव का विकास करना है। अपने गांव का विकास वह स्वयं करेंगे। गांव को जगायेंगे, पंचायतों का सशक्तिकरण करेंगे और आगामी पांच वर्षों में यह संकल्प पूरा कर दिखायेंगे।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामवासियों में विकास के प्रति जागरूकता बढ़ी है। राजनेताओं से भी उनकी अपेक्षा बढ़ रही है। ऐसे में ग्रामवासी, वनवासी गांव की सबसे कीमती प्राकृतिक संपदा, शुद्ध हवा, पानी, जमीन, पशुधन को छोड़कर शहर को पलायन कर रहे हैं। इनकी रक्षा को उन्हें ही आगे आना होगा।