अपनी मर्जी से बगैर किसी लालच या दबाव के शादी करने वाली युवती के पति पर उसे भगा ले जाने का जुर्म नहीं बन सकता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस अहम विधि व्यवस्था के साथ युवती के परिवारीजनों की तरफ से मड़ियांव थाने में उसके पति के खिलाफ भगा ले जाने के आरोपों में दर्ज कराई गई रिपोर्ट समेत उससे संबंधित पूरी कार्रवाई को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति अजय लांबा व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला युवती व उसके पति की याचिका को मंजूर कर सुनाया। याचियों का कहना था कि उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह योग्य उम्र होने पर शादी कर लिया,जिसे युवती की माता ने स्वीकार नहीं किया और उस पर आपराधिक कार्रवाई शुरू हो गई।
उधर,सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रिशाद मुर्तजा ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि युवती 31 हफ्ते की गर्भवती है और उसने अपने कलमबंद बयान में बहला-फुसलाकर भगा ले जाने केआरोपों का समर्थन नहीं किया है।हालांकि अभियोजन एजेंसी ने इस आधार पर अपराध बनने की बात कही कि जब युवती,युवक के साथ गई तो उसकी उम्र 18 साल से कुछ माह कम थी।