सिगरेट का सुट्टा मारने हो या सिगार का कश लगाना अब लोगों को यह शौक पहले की अपेक्षा अधिक महंगा पड़ेगा। यही नहीं सादा पान मसाला खाना हो या खैनी दबाने के लिए अधिक कीमतें चुकानी पड़ेगी।
राज्य सरकार इन सामानों पर वैट की दर 10 से 15 फीसदी तक बढ़ाने जा रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। इससे राज्य सरकार को सालाना 200 करोड़ रुपये अधिक राजस्व मिलेगा।
राज्य सरकार उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2008 (वैट) की वसूली उत्पादों पर करती है। प्रदेश में सिगरेट व सिगार पर मौजूदा समय 25 प्रतिशत के हिसाब से वैट की वसूली की जा रही है।
इसी तरह सादा पान मसाला, खैनी, जर्दा, सुर्ती व तंबाकू से निर्मित सामान पर 30 प्रतिशत की दर से वैट की वसूली की जाती है। आयुक्त वाणिज्य कर ने शासन को प्रस्ताव भेजते हुए बताया कि इन उत्पादों पर जम्मू एवं कश्मीर में 28 मई 2013 से वैट 30 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है।इसलिए उत्तर प्रदेश में भी इन उत्पादों पर वैट की दर 40 फीसदी कर दिया जाना चाहिए।
यूपी में खुली सिगरेट की बिक्री पर लगेगी रोक
इन उत्पादों पर वैट की दर बढ़ाए जाने से राज्य सरकार को हर साल 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने लगेगी। इसके आधार पर ही कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है।
कैबिनेट निर्णय के बाद वाणिज्य कर विभाग जैसे ही इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगा सिगरेट, सिगार, सादा पान मसाला, खैनी, जर्दा, सुर्ती व तंबाकू से निर्मित अन्य उत्पाद बाजार में महंगे मिलने लगेंगे।
प्रदेश सरकार सिगरेट की खुली बिक्री पर रोक लगाने जा रही है। फुटकर दुकानदार डिब्बे खोल कर सिगरेट नहीं बेंच सकेंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को भी मंजूरी देने की तैयारी है।
दरअसल, खुली सिगरेट की बिक्री में इससे होने वाले नुकसान की चेतावनी का पता नहीं चल पता है। जबकि नियम यह है कि सिगरेट की बिक्री बंद पैकेट में हो और इसके ऊपर इससे होने वाले नुकसान के बारे में फोटो के साथ चेतावनी के रूप में छापा जाए। सिगरेट की खुली बिक्री पर इस चेतावनी को लोग पढ़ नहीं पाते हैं। इसलिए खुली सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी है।