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Lucknow News: स्कूल-उच्च शिक्षा में पालि भाषा, साहित्य को किया जाएगा शमिल

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कार्यक्रम में शामिल डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य ।
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लखनऊ। भगवान बुद्ध ने जनता की बोलचाल की सर्वमान्य भाषा पालि में उपदेश दिए थे, लेकिन धीरे-धीरे यह भाषा प्रचलन में कम हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। यूपी सरकार की भी योजना है कि भविष्य में स्कूल और उच्च शिक्षा में पालि भाषा, साहित्य को शामिल किया जाए।
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बौद्ध विहार शांति उपवन में शनिवार को तीन दिवसीय पालि साहित्य सम्मेलन में मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यह जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, बुद्ध के विचार अपनाने से इच्छाओं का त्याग, क्रोध को वश में करने, मन को शांत रखने तथा ज्ञान बढ़ाने में मदद मिलती है।
कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा में पालि का प्रमुख स्थान है और इसे विश्व स्तर पर सवंर्धित किया जाएगा। थाईलैंड के भदंत डॉ. चरन ने बताया कि पालि भाषा बौद्ध धर्म का मूल तत्व है। हरगोविंद बौद्ध ने बताया कि पालि साहित्य मुख्य रूप से भगवान बुद्ध के उपदेशों का संग्रह है।
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चित्रकला प्रदर्शनी, शिक्षण सत्र का आयोजन

सम्मेलन में बौद्ध चित्रकला प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें बौद्ध संस्कृति व सभ्यता के बारे में बताया गया है। प्रथम अकादमिक सत्र की अध्यक्षता चित्रकूट रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर पांडेय एवं दूसरी सत्र की अध्यक्षता नव नालंदा महाविहार के पूर्व कुलपति प्रो. राम नक्षत्र प्रसाद ने की। भदंत डॉ. राहुल बोधि विशिष्ट अतिथि थे। दोनों सत्रों में 20 शोधपत्र पेश किए गए। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा, यूपी पहला राज्य है, जो पालि साहित्य सम्मेलन करवा रहा है। इसमें वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, नीदरलैंड, बांग्लादेश समेत 15 देशों के बौद्ध विद्वान सहित 800 से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं।
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