गिरमिटिया मजदूरों की कहानियों को लेकर पलाश मॉडल तैयार करने वाली डॉ. अलका सिंह।
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ. अलका सिंह ने प्रवासी भारतीयों की ऐतिहासिक यात्रा को नई पहचान देने की दिशा में अनूठी पहल की है। उन्होंने ग्लोबल गिरमिटिया इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ‘पलाश मॉडल’ पेश किया, जो उन गिरमिटिया मजदूरों की अनकही कहानियों को दस्तावेज के रूप में सामने लाने का माध्यम बनेगा, जिन्हें ब्रिटिश काल में मजदूरी के लिए विदेश ले जाया गया था।
डॉ. अलका सिंह ने बताया कि फिजी के नाडा स्थित ग्लोबल गिरमिटिया इंस्टीट्यूट के ऑनलाइन सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए इस मॉडल का उद्देश्य भारत से फिजी, मॉरीशस, गुयाना और सूरीनाम जैसे देशों में भेजे गए गिरमिटिया परिवारों के इतिहास को संगठित, संरक्षित और साझा करना है। उन्होंने कहा कि पलाश मॉडल मौखिक इतिहास, अभिलेखीय शोध और सामुदायिक सहभागिता को जोड़कर एक ऐसा समग्र ढांचा प्रदान करता है जिससे गिरमिटिया समुदाय की सांस्कृतिक जड़ों और विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकेगा।
जानिए क्या हैं गिरमिटिया मजदूर
19वीं सदी में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल के कुछ हिस्सों से गिरमिटिया के नाम से प्रसिद्ध अनुबंधित मजदूरों को अन्य उपनिवेश वाले देशों में भेजा गया था। फिजी, मॉरीशस, गुयाना और सूरीनाम जैसे देशों में ये मजदूर बस गए हैं। अब इनकी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए शोध हो रहे हैं।