रायबरेली। ठंड बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में ह्रदय रोगियों की संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है। सोमवार को ओपीडी में 80 से अधिक मरीज इलाज करवाने के लिए पहुंचे। सीने में दर्द होने पर कई मरीजों को भर्ती किया गया। जिला अस्पताल में ह्रदय के मरीजों के इलाज के लिए पुख्ता प्रबंध न होने के कारण गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। जांच के नाम पर मात्र ईसीजी की सुविधा उपलब्ध है।
अमूमन ठंड का ज्यादा असर ह्रदय पर पड़ता है, लेकिन इस साल ठंड की शुरुआत में ही ह्रदय के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 70 से 80 ह्रदय रोगी आ रहे हैं। सामान्य मौसम में 20 से 25 मरीज ही ओपीडी में इलाज कराने के लिए पहुंच रहे थे। सोमवार को ओपीडी में 80 से अधिक हृदय रोगी इलाज कराने के लिए ओपीडी में पहुंचे। ईसीजी जांच की संख्या भी रोजाना सौ से अधिक हो गई है।
खास बात यह कि जिला अस्पताल में ह्रदय रोगियों की जांच के नाम पर मात्र ईसीजी ही हो पाती है। अन्य जांचों की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को एम्स या लखनऊ रेफर करना पड़ रहा है। हॉर्ट के सामान्य मरीजों का ही इलाज हो पा रहा है।
ठंड में बरतें सावधानी : जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेष डॉ. सलीम का कहना है कि सर्दी में हृदय की बीमारी का ज्यादा खतरा रहता है। अधिक सर्दी पड़ने से दिल से खून की आपूर्ति करने वाली नसें सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
दिल में खून की नसों में कोलेस्ट्राल जमने से मरीजों को सर्दी में सीने में दर्द, एंजाइना और हार्ट अटैक के लक्षण भी उभर आते हैं। लक्षण प्रतीत होते ही घबराएं नहीं, चिकित्सीय सलाह लेकर इलाज शुरू कराएं। इस समय अस्पताल में सामान्य दिनों की तुलना में लगभग तीन गुना हृदय के मरीज ओपीडी में आ रहे हैं।