लखनऊ। लोकसंगीत की मधुर स्वर लहरियों और रंग-बिरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शाम ने रविवार को गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी परिसर को उत्सवमय बना दिया। सोनचिरैया संस्था की ओर से आयोजित लोकनिर्मला सम्मान के सातवें संस्करण में राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड व भजन गायिका पद्मश्री बतूल बेगम को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह मुख्य अतिथि रहीं।
समारोह की शुरुआत संस्था की संस्थापिका और प्रख्यात लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के उद्बोधन से हुई। उन्होंने अपनी दिवंगत माता निर्मला अवस्थी को स्मरण करते हुए बताया कि मां की प्रेरणा और संगीत के प्रति समर्पण ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। मां की स्मृति में महिला लोक कलाकारों को सम्मानित करने का संकल्प ही इस आयोजन की प्रेरणा है।
मालिनी अवस्थी ने विंध्याचल देवी की स्तुति माई विंध्याचल की महिमा अपार बा'''' से चैत्र नवरात्रि की आहट जगाई और अपने लोकप्रिय होरी गीत ''''छैल छबीले चित चोर ओ रसिया'''' से माहौल को उत्साह से भर दिया। कानपुर की कविता सिंह ने राम जी ने जन्म लियो आज अवधपुर बाजे बधईया... गाकर राम जन्म की बधाई प्रस्तुत की। बलिया की कृष्णा ने देवी पचरा मैया मोरी सोने की कहरवा लइके डोलत सुनाकर भक्तिभाव जगाया। बस्ती की रंजना अग्रहरी ने फागुनी रंगों में रंग दिया।
बतुल बेगम के केसरिया बालम ने किया सम्मोहित
समारोह में प्रो. मांडवी सिंह ने पद्मश्री बतूल बेगम को एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्रशस्ति पत्र देकर लोकनिर्मला सम्मान से अलंकृत किया। इसके बाद बतूल बेगम ने ‘गजानंद देवा’ से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की और ‘ओ राम माने प्यार लागो सा’, ‘केसरिया बालम’, ‘म्हाने खेलन देयो गणगौर’ तथा ‘रामदेव जी महाराज’ जैसे गीतों से राजस्थान की लोकधुनों की सुगंध बिखेर दी। कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री विद्याविंदु सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, एसएनए के निदेशक शोभित नाहर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पद्मश्री बतूल बेगम को लोकनिर्मला सम्मान
पद्मश्री बतूल बेगम को लोकनिर्मला सम्मान
पद्मश्री बतूल बेगम को लोकनिर्मला सम्मान
पद्मश्री बतूल बेगम को लोकनिर्मला सम्मान
पद्मश्री बतूल बेगम को लोकनिर्मला सम्मान
पद्मश्री बतूल बेगम को लोकनिर्मला सम्मान