बायोमेड कंपनी की पोलियो वैक्सीन में पी-2 वायरस पाए जाने के बाद प्रदेश में इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। इस कंपनी की वैक्सीन को प्रतिबंधित करते हुए पूरे प्रदेश में दूसरी कंपनियों की वैक्सीन आपूर्ति की जा रही है।
दरअसल, प्रदेश में पोलियो वैक्सीन की आपूर्ति बायोमेड सहित पांच कंपनियां करती हैं। कुछ बच्चों के मल में पी-2 वायरस पाए जाने के बाद जब वैक्सीन की जांच हुई तो पता चला कि बायोमेड कंपनी की वैक्सीन में पी-2 वायरस है। इसके बाद इस कंपनी की सभी वैक्सीन को प्रतिबंधित कर दिया गया और वैक्सीन के स्टॉक को वापस ले लिया गया। इससे सरकारी अस्पतालों में दिक्कत हुई, लेकिन दूसरी कंपनियों की वैक्सीन भेजकर स्थिति संभाली जा रही है।
गौरतलब है कि नवजातों को पोलियो वैक्सीन जन्म के बाद जीरो डोज के तौर पर दिया जाता है। इसके बाद डेढ़ माह, ढाई माह, साढ़े तीन साल तक दवा पिलाई जाती है। पांच साल की उम्र में बूस्टर लगाया जाता है। विशेष पोलियो उन्मूलन अभियान में भी ये वैक्सीन पिलायी जाती है। माना जा रहा है कि जिन बच्चों को ये वैक्सीन पिलायी गई, उनके मल से वायरस फैल सकता है।