किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ऑक्सीजन प्लांटों से गायब 150 से अधिक सिलेंडरों की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है। लगभग छह महीने से इन सिलेंडरों की तलाश की जा रही है।
ऑक्सीजन ऑपूर्ति करने वाली कंपनियों से इस बारे में पूछताछ की गई। मार्च में जब मामला खुला तो उन्हें नोटिस देने की बात कही गई लेकिन र्कारवाई कोई नहीं हुई। अब उन्हें नोटिस दी जा रही है।
केजीएमयू के पास ऑक्सीजन गैस के 700 सिलेंडर थे। इनमें से 350 गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों में रहते हैं जबकि 350 केजीएमयू में इस्तेमाल होते हैं।
छह माह पहले जब केजीएमयू में ऑक्सीजन की किल्लत हुई तो सिलेंडरों की गिनती शुरू हुई। जांच में पता चला कि इनमें से 150 सिलेंडर डेढ़ साल के अंदर एक-एक कर चोरी हो गये या गायब कर दिए गए।
जब सिलेंडर की कमी हुई तो अधिकारियों की आंखे खुली। सिलेंडर चोरी के मामले की जांच शुरू हुई।
प्लांट संचालन करने वालों और गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों के कर्मचारियों की आपसी मिलीभगत से ये सिलेंडर गायब हुए।
बीते छह माह से ये मामला दबा हुआ था। बीते दिनों जब ऑक्सीजन की दिक्कत फिर शुरू हुई तो पता चला कि गायब सिलेंडर के मामले में कोई कार्रवाई ही नहीं हुई है।
इसके बाद नए सिरे से सिलेंडर खोजने की कवायद हुई। अब सिलेंडर की संख्या पूरी करने के लिए आपूर्तिकर्ता कंपनियों को नोटिस दिया गया है।
इसी से नाराज एक कंपनी के संचालक की केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों से कहासुनी भी हो गई।
खुद को एक महिला सपा नेता का रिश्तेदार बताने वाले कंपनी संचालक ने केजीएमयू प्रशानिक अधिकारियों को दबाव में लेने का प्रयास किया लेकिन उसे नोटिस जारी कर दी गई है।
केजीएमयू प्रशासन इस मामले को सुलझाने में कड़ी कार्रवाई के मूड है। जल्दी ही ऑक्सीजन आपूर्ति और प्लांट संचालन के लिए नए सिरे से टेंडर की तैयारी की जा रही है।
जिससे सक्षम लोगों को ऑक्सीजन आपूर्ति का जिम्मा दिया जा सके। केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि मरीजों की जिंदगी और उनके इलाज को लेकर कोई समझौता नहीं होगा।