लखनऊ। निजी अस्पतालों में मरीजों से ऑक्सीजन के नाम पर प्रति घंटे 150 से 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कहीं एक दिन के ऑक्सीजन सपोर्ट का बिल 4800 रुपये थमाया जा रहा है तो कहीं पांच दिन के लिए पांच हजार रुपये लिए जा रहे हैं। इसकी वजह ऑक्सीजन शुल्क की कोई निर्धारित सरकारी दर न होना है। ऐसे में मरीजों के परिजनों पर इलाज के खर्च का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
एक जंबो ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत करीब 350 रुपये बताई जा रही है, जो आठ से दस घंटे तक चलता है। इसके बावजूद अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए अलग-अलग शुल्क वसूले जाने की शिकायतें हैं। दरें तय न होने से मरीजों के परिजनों को बिल की मनमानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद भी एक भी अस्पताल पर विभाग के जरिये नकेल नहीं कसी गई। जबकि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जीवन रक्षक दवाओं और ऑक्सीजन जैसी आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी या तय कीमत से अधिक वसूली करना दंडनीय अपराध है। इसमें सात साल तक की जेल हो सकती है।
केस 1: शहीद पथ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी के एक निजी अस्पताल में बीते माह भर्ती मरीज को पहले वेंटिलेटर पर रखा गया। वेंटिलेटर हटने के बाद एक दिन ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। मरीज के खुद सांस लेने की स्थिति में आने के बावजूद करीब पांच दिन के दौरान ऑक्सीजन के नाम पर पांच हजार रुपये वसूल लिए गए।
केस 2: गोमतीनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग महिला को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। अस्पताल ने 200 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से बिल बनाया। एक दिन का 4800 रुपये बिल देखकर परिजन हैरान रह गए।
कोविड के दौरान अधिक वसूली किए जाने की शिकायत मिल रही थी। इस पर नकेल कसी गई थी। अब ऑक्सीजन शुल्क बेड चार्ज के साथ लिया जाता है। अधिक वसूली की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -ब्रजेश यादव, एफएसडीए सहायक मंडल आयुक्त
यहां करें वसूली की शिकायत
- पुलिस : अधिक वसूली की शिकायत के लिए 112 पर संपर्क करें।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन : टोल फ्री नंबर 1915 पर कॉल करें या इसकी वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं।
- जिला प्रशासन/ड्रग कंट्रोलर : संबंधित कार्यालय में शिकायत करें।
- पक्का बिल लें : ऑक्सीजन या अन्य चिकित्सा सेवाओं के भुगतान की रसीद जरूर लें।