ऑक्सफेम ने देश के मौजूदा विकास मॉडल को लेकर रिपोर्ट पेश की
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देश में विकास का मौजूदा मॉडल बेरोजगारी बढ़ाने का ही काम कर रहा है। ऑक्सफेम की रिपोर्ट के मुताबिक जितने निवेश का दावा सरकार करती है, उसका 10 प्रतिशत ही वास्तविक निवेश होता है। असंगठित सेक्टर के श्रमिकों की बहुतायत होने की वजह से उनके हितों की अनदेखी की जा रही है।
ऑक्सफेम ने रोजगार के हालात पर बृहस्पतिवार को यहां प्रेस क्लब में एक रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक नंदकिशोर सिंह ने बताया कि श्रम व रोजगार मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2017-18 में कहा गया है कि रोजगार सभी के दैनिक जीवन का हिस्सा है। सरकार की इस तरह की सोच के बाद भी हकीकत बिल्कुल अलग है।
शैक्षिक योग्यता के बावजूद रोजगार मिलना कठिन है। अरुचिकर रोजगारों में फंसने की वजह से वेतन जहां बहुत कम है, वहीं शैक्षिक योग्यता से भी निम्न स्तर वाला काम लोग कर रहे हैं। 2018 में यूपी के पुलिस विभाग में चपरासी व संदेशवाहक केपदों के लिए 93 हजार आवेदन आए। इनमें से 3700 अभ्यर्थी पीएचडी, 28 हजार पीजी, 50 हजार ग्रेजुएट थे, जबकि इन पदों के लिए शैक्षिक योग्यता केवल पांचवीं पास थी।
ऑक्सफेम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रोजगार सृजन के आंकड़े कम हुए हैं। खुद श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी चार दशक में अधिकतम स्तर 6.1 पर पहुंच गई। वर्ष 2011-12 और 2015-16 के बीच औद्योगिक क्षेत्र में भी 1.06 करोड़ रोजगार कम हो गए। कामगारों के लिए रोजगार की गुणवत्ता भी घटी है।