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बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: रेल लाइन की जमीन का करा लिया फसल बीमा, मालिक को पता ही नहीं... पैसा हड़प गया कोई और

Tue, 16 Dec 2025 08:08 PM IST
भूपेन्द्र सिंह चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

फसल बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। यहां एक ही जमीन की दो खतौनी बना ली गईं। रेल लाइन की जमीन का फसल बीमा करा लिया। मालिक को पता ही नहीं पैसा कोई और हड़प गया। 
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में फसल बीमा योजना की पड़ताल में झांसी के नया गांव में गजब का कारनामा सामने आया। ग्राम सभा में खाता संख्या 476 की दो खतौनी मिली। एक खतौनी में यह जमीन फूड कार्पोरेशन और दूसरी में रेलवे लाइन के नाम दर्ज है। इस पर शिवानी पाल पुत्री बृजभान पाल ने 1.50 लाख रुपये का बीमा लिया है।

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यह केस तो बानगी मात्र है। इसी तरह सरकारी जमीन पर अलग-अलग नाम से तमाम लोगों ने बीमा कराकर रकम खाते में डलवा ली है। झांसी के बाजना और डंगरवाहा के तमाम लोगों ने दूसरे के जमीन पर बीमा राशि ले ली है। 
महोबा के लुहारी गांव में गाटा संख्या 908 भोला प्रसाद के नाम दर्ज है। गाटा संख्या 272 में नाला है। इन दोनों जमीन पर अनूप कुमार ने फसल बीमा कराया है। ग्राम खेवरइया में 125 किसानों ने 40 लाख, सिजवाहा में 95 किसानों ने 24 लाख क्लेम लिया है। क्लेम लेने वाले करीब 350 किलोमीटर दूर सागर जिले के निवासी हैं।

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महोबा में जेल जा चुके हैं 19

बंजर, नाला की भूमि और बिना किसान की जानकारी दिए फर्जी बटाईदार के जरिए यह खेल हुआ है। किसानों ने आंदोलन किया तो 26 नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है, जिसमें 19 जेल जा चुके हैं। सामुदायिक सेवा केंद्र संचालक, दलाल और बीमा रकम लेने वाले शामिल हैं। ये बांदा सहित अलग-अलग जिले के निवासी हैं। 

किसान नेता गुलाब सिंह की मांग है कि प्रदेशभर में जांच कराई जाए। क्योंकि जिन कंपनियों ने बुंदेलखंड में बीमा किया है, वही अन्य जिलों में भी हैं। महोबा के अलावा अन्य जिलों में अभी तक जांच शुरू नहीं होने से साफ है कि विभागीय अधिकारियों की मंसा ठीक नहीं है।
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पीएम फसल बीमा योजना की स्थित

 
वर्ष किसान बीमित राशि क्षतिपूर्ति वितरण
2023-24 30.40 लाख 15925.35 429.86
2024-25 31.27 लाख 14902.43 408.41
2025-26 24.46 लाख 10136.84 142.02

(नोट- बीमित राशि और क्षतिपूर्ति करोड़ में। वर्ष 2025-26 में अभी रबी सीजन चल रहा है। )

क्या कहते हैं जिम्मेदार

कृषि निदेशक डा. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि बुंदेलखंड के सभी अधिकारियों को सतर्क किया गया है। हर शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है। जिलाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए सांख्यिकी विभाग सतर्क है।
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