रायबरेली। जिले में गंगा एक्सप्रेसवे और रायबरेली-प्रयागराज हाईवे के चौड़ीकरण कार्य में लगे डंपर ओवरलोड चलाए जा रहे हैं। इनकी वजह से करीब 88 सड़कें खस्ताहाल हो गईं हैं। इन सड़कों की छह महीने पहले मरम्मत कराई गई थी। अब डामर तक गायब हो गया है। गंगा एक्सप्रेसवे और रायबरेली-प्रयागराज हाईवे के चौड़ीकरण में लगी एजेंसी और जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सड़कों के खराब होने से ग्रामीणों को शहर व हाट बाजार जाने में काफी समस्या से दोचार होना पड़ रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण खंड एक और दो की कुल 76 सड़कें गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में मिट्टी ढोने वाले डंपरों ने खराब कर दिए हैं। इसके साथ में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की 14 सड़कें भी पूरी तरह से खराब हो गईं हैं। खीरों, डलमऊ और ऊंचाहार, जगतपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित हुईं हैं। सड़कों के खराब होने के चलते ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए कई बार गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कराने वाले यूपीडा और एनएचएआई के अधिकारियों को पत्र भेजा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
निर्माण में खर्च हुए 90 करोड़
छह महीने पहले इन सड़कों की मरम्मत कराने में करीब 90 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अब सड़कों की दशा इतनी खराब हो गईं है कि डामर तक गायब हो गया है। गिट्टियां बाहर निकल आईं हैं। इससे आए दिन लोग गिरकर चोटिल भी हो रहे हैं।
अब पांच साल बाद मिलेगा बजट
ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए पांच साल में शासन से बजट मिलता है। छह महीने पहले सड़कों की मरम्मत की गई थी। अब इनकी दोबारा मरम्मत पांच साल बाद ही होगी। यदि खराब हुईं सड़कों को जल्द ठीक नहीं कराया गया, तो इनपर बड़े-बड़े गड्ढे हो जाएंगे जो हादसों का सबब बनेंगे।
विभाग से किया गया पत्राचार
लोक निर्माण विभाग की जो सड़कें ओवरलोड डंपरों से उखड़ीं हैं। उन्हें ठीक कराने के लिए संबंधित विभाग से पत्राचार किया गया। अभी तक जवाब नहीं आया।
-प्रमोद कुमार राणा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग खंड द्वितीय