लखनऊ। पंजीकरण राशि जमा करने के बाद कई वर्षों तक आवास विकास परिषद के चक्कर लगाए, लेकिन फ्लैट नहीं मिला तो सेक्टर-डी एलडीए कॉलोनी निवासी श्यामलाल ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया। इस पर आयोग ने आवास विकास को निर्देशित किया है कि परिवादी की जमा राशि को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। साथ ही परिवादी को मानसिक-आर्थिक हानि व वाद व्यय के लिए 20 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष नीलकंठ सहाय ने फैसला सुनाते हुए यह भी निर्देश दिया है कि यदि 45 दिन के भीतर आवास विकास परिवादी को संपूर्ण धनराशि अदा नहीं करता है तो 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान देना होगा।
27 मार्च 2024 को श्यामलाल ने परिवाद दाखिल कर आयोग को बताया था कि उन्होंने 28 मार्च 2017 को अवध विहार योजना के अंतर्गत शारदा एन्क्लेव में वन बीएचके फ्लैट के लिए पंजीकरण राशि 55 हजार रुपये जमा की थी। फ्लैट की कीमत 10.45 लाख रुपये थी, जिसका निर्माण 30 माह में पूरा होना था। तय अवधि के बाद जब परिवादी ने पता किया तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। उन्होंने आवास विकास के कार्यालय के कई चक्कर लगाए, मगर न तो फ्लैट मिला, न ही जमा राशि। इस पर श्यामलाल ने परिवाद दाखिल किया, जिस पर दो जुलाई को ही फैसला सुनाया गया।