रायबरेली। चोरी के मामले में युवक को उन्नाव से पकड़कर जेल भेजने के मामले में हाईकोर्ट ने खीरों थाने के पुलिस कर्मियों पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेश पर गठित स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) की जांच में चोरी का मामला फर्जी मिला था। इसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई थी। मंगलवार को हाईकोर्ट ने खीरों पुलिस पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश देकर याचिका की सुनवाई पूरी की।
खीरों पुलिस ने बीती 30/31 मार्च की रात सरेनी थाना क्षेत्र के नयाखेड़ा निवासी रामशंकर मिश्रा के बेटे अलख मिश्रा को टॉवर की बैटरी चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। युवक घर से कानपुर के लिए निकला था। मौरावां पेट्रोल पंप उन्नाव पर गाड़ी में पेट्रोल भराने के लिए रुकने पर उसे पकड़ लिया गया था। अलख की मां गोमती मिश्रा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर खीरों पुलिस पर फर्जी मामले में बेटे को जेल भेजने और दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की याचना की थी।
इस पर हाईकोर्ट ने एसआईटी का गठन कर जांच रिपोर्ट देने के आदेश पुलिस को दिए थे। 13 अप्रैल को अलख को कोर्ट से जमानत मिल गई तथा वह जेल से रिहा हो गया। इस मामले में तत्कालीन एसपी अभिषेक अग्रवाल को भी हाईकोर्ट में तलब किया गया था। मई माह में वरिष्ठ अधिकारियों की एसआईटी टीम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की।
एसआईटी की जांच में पाया गया कि 30/31 मार्च की रात मौरावां पेट्रोल पंप उन्नाव से अलख मिश्रा, राधेश प्रताप सिंह व संजय सिंह को खीरों थाना लाया गया। खीरों थाना के अभिलेखों में इसका कोई अंकन नहीं मिला। तीनों की गिरफ्तारी दूसरी जगह से दिखाई गई। इसमें खीरों पुलिस की लापरवाही साफ दिखी।
गत मंगलवार को जस्टिस जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी व विवेक चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। दोनों न्यायाधीशों ने एसआईटी की रिपोर्ट को सही ठहराते हुए खीरों थाने के संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
पुलिस को अब लगानी होगी फाइनल रिपोर्ट
हाईकोर्ट के आदेश में साफ है कि खीरों पुलिस ने चोरी के मामले में फर्जी तरीके से युवक के खिलाफ रिपोर्ट दी। इस पर खीरों पुलिस को इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगानी होगी। जो विवेचना चल रही है, उसमें जमानत पर रिहा युवक का नाम हटाना होगा। रायबरेली कोर्ट को इसे लेकर विवेचना के साथ नाम हटाने की कानूनी कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद जमानत पर रिहा युवक पूरी तरह से मामले से बरी हो सकेगा।