लखनऊ। लविवि में जरूरत और मानकों को नजरअंदाज कर सिक्योरिटी के नाम पर मनमाना भुगतान किया जा रहा है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा की ओर से इस पर ऑडिट आपत्ति लगाई गई है। ऑडिट आपत्ति में तीन अलग-अलग एजेंसियों को कुल मिलाकर 14 लाख रुपये के गलत भुगतान का आरोप लगाया गया है। यह भुगतान वित्तीय वर्ष 2015-16 का है। ऑडिट में इसके साथ ही कई अन्य भुगतान गलत होने की बात कही गई है।
लविवि के पास खुद के गार्डों की लंबी फौज है। इसके बावजूद विवि में सरकारी एजेंसी के साथ ही निजी एजेंसी से सुरक्षा गार्ड की तैनाती की जा रही है। विवि में वित्तीय वर्ष 2015-16 में सात लाख 51 हजार 883 रुपये, पांच लाख तीन हजार 325 रुपये और एक लाख 45 हजार 139 रुपये के तीन भुगतान किए गए। इस पर स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने आपत्ति जताई है। ऑडिट आपत्ति में कहा गया है कि शासनादेश के अनुसार, राजकीय विभाग या फिर सरकारी एजेंसी से ही सुरक्षा गार्ड की तैनाती होनी चाहिए। इसके बावजूद विवि प्रशासन ने निजी एजेंसी से सुरक्षा गार्ड ले लिए। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने इसे अनियमित भुगतान माना है।
बिना अनुमोदन अतिथि प्रवक्ताओं को पांच लाख का भुगतान
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने विवि के विभिन्न विभागों में पढ़ाने वाले विषय विशेषज्ञों को बिना अनुमोदन के हुए भुगतान को गलत बताया है। इस मद में हुए पांच लाख 11 हजार 900 रुपये के भुगतान को गलत बताया गया है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म को साल में 25.50 लाख
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने लविवि के लेखा विभाग में दोहरी लेखा प्रणाली का उपयोग न करके इस काम के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म को भुगतान करने को अनियमित करार दिया है। इस काम के लिए लेखा विभाग ने चार साल में चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म को कुल मिलाकर 25.50 लाख का भुगतान किया है।
दवाई खरीद में भी अधिक भुगतान
ऑडिट में खुलासा हुआ है कि डिस्पेंसरी के लिए दवा खरीद में भी ज्यादा भुगतान किया गया है। इस पर आपत्ति है कि जिस अनुबंध के तहत दवा सप्लाई हुई है, उसकी शर्तों का पालन न करके सरचार्ज के रूप में एक लाख 95 हजार 924 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया है।
अनुमति के बाद किया भुगतान
अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर हुई बैठक में लविवि को अनुमति दी गई थी कि वह निजी एजेंसी से सुरक्षा प्रहरी रख सकता है। अन्य ऑडिट में से ज्यादातर का भुगतान का निराकरण किया जा चुका है।
शैलेश शुक्ला
कुलसचिव, लविवि