सपा और अन्य विपक्षी दल पूरी ताकत सामाजिक समीकरणों को साधने में लगा रहे हैं। जोर इस बात पर है कि पिछड़ों, दलितों व अल्पसंख्यकों का समीकरण मजबूत हो। हालांकि फूलपुर में सपा की तरह भाजपा का प्रत्याशी भी पिछड़े वर्ग के कुर्मी समाज से है। इससे कुर्मी वोटों में बंटवारे की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
गोरखपुर में भाजपा का प्रत्याशी ब्राह्मण है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के व्यक्तिगत प्रभाव के चलते पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का बंटवारा होने की संभावना है। फूलपुर में बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद के चुनाव मैदान में उतरने से भी सपा के संभावित समीकरण को झटका लगा है।
वोटिंग बढ़ाने को भाजपा-सपा ने ताकत झोंकी
बदले सियासी हालात में उपचुनाव सत्तापक्ष और विपक्ष के लिए अहम हो गया है। उपचुनाव में कम मतदान की आशंका से उनकी बेचैनी बढ़ी हुई है। भाजपा और सपा ने वोटरों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बूथ स्तर पर प्लानिंग की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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गोरखपुर से वीर बहादुर सिंह के बाद योगी आदित्यनाथ एक साल पहले मुख्यमंत्री बने हैं। उनके सीएम बनने के बाद गोरखपुर जिले में बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू हुए हैं। पिपराइच में नई चीनी मिल लगने जा रही है। योगी गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जितने मत मिले, सपा-बसपा को मिलाकर भी उतने वोट नहीं मिल पाए थे। उनका सीएम होना और विकास कार्यों की शुरुआत भाजपा की बड़ी ताकत है।
फूलपुर में केशव के कौशल की परीक्षा
फूलपुर में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी है। कई मंत्री, विधायक, प्रमुख नेता कैंप कर रहे हैं। इस सीट पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा दांव पर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में केशव बड़े अंतर से विजयी हुए थे। उन्होंने भी क्षेत्र में कई विकास कार्य शुरू कराए हैं। केशव का डिप्टी सीएम व लोकनिर्माण मंत्री होना भी भाजपा के लिए लाभदायक हो सकता है लेकिन असली परीक्षा उनके रणनीतिक कौशल की होगी।