ऐसा पहली बार हुआ है कि तीन दिन केसत्र में विधानसभा में जनता के किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। शनिवार को विधायी कार्य का रिकॉर्ड बना, लेकिन विपक्ष को बोलने का मौका नहीं मिला। सत्र में पहली बार न प्रश्न काल हुआ, न ही कोई कार्यस्थगन लिया गया। चंद मिनटों में दो दर्जन से ज्यादा विधेयक पारित किए गए। इनमें कई विधेयक इतने महत्वपूर्ण हैं कि उन पर लंबी चर्चा की दरकार थी।
कोरोना काल में आहूत सत्र कई मायनों में अलग रहा। पहली बार तीनों दिन की शुरुआत निधन की सूचना से हुई। पांच मौजूदा विधायकों के साथ ही 22 पूर्व विधायकों के निधन पर श्रद्धांजलि दी गई। पहली बार दो कैबिनेट मंत्रियों के निधन पर शोकसभा हुई। पहले 20, 21 एवं 24 अगस्त को सदन की कार्यवाही प्रस्तावित थी।
22, 23 को अवकाश था। 20, 21 को दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सदन स्थगित हो गया था। कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं हुए। वह कुछ दिन पहले ही कोरोना से जंग जीतकर एसजीपीजीआई से घर लौटे हैं।
इस सत्र में सरकार के पास विधायी कार्य ज्यादा था, इसलिए सरकार ने शनिवार के अवकाश के बावजूद सदन की बैठक बुलाई। शनिवार को कार्यवाही शुरू होते ही विधायी कार्य प्रारंभ कर दिया। सभी विधेयक व अन्य कार्य निपटाने के बाद मुख्यमंत्री का संबोधन हुआ। इसके बाद सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।
मुख्य विपक्षी दल सपा ने कानून-व्यवस्था और कोरोना पर चर्चा कराने के लिए नियम 56 तथा बाढ़ पर चर्चा के लिए नियम 311 में नोटिस दिया था। उज्ज्वल रमण सिंह ने कानून-व्यवस्था पर चर्चा के नोटिस में इस महीने की बड़ी आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए जनमानस में भय और आक्रोश व्याप्त होने की बात कही थी।
इसी तरह डॉ. संग्राम सिंह व राकेश प्रताप सिंह की ओर से दिए गए नोटिस में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते जनता की दिक्कतों का जिक्र करते हुए चर्चा कराने की मांग थी। बाढ़ पर नरेंद्र वर्मा और नफीस अहमद ने नोटिस दिया था।
लालजी वर्मा नहीं मांग सके स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री के भाषण के समय सपा, बसपा, कांग्रेस व सुभासपा के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए थे। भाषण खत्म होते ही बसपा के सदस्य सदन में आ गए। बसपा दल के नेता लालजी वर्मा बोलना चाहते थे। विपक्ष की ओर से सदन में बसपा के सदस्य ही मौजूद थे। अध्यक्ष ने एक बार उनसे कहा कि आप स्पष्टीकरण मांग सकते हैं लेकिन संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना व औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने विरोध जताया।
काफी देर तक चले तर्क-वितर्क के बावजूद लालजी वर्मा को बोलने का मौका नहीं मिला। संसदीय कार्यमंत्री ने सदन को बेमियादी स्थगित करने का प्रस्ताव रखा और अध्यक्ष ने ध्वनिमत से इसे स्वीकार कर लिया। इस तरह सोमवार को सदन चलने की पूर्व घोषणा के बावजूद समय से पहले सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
27 विधेयक पारित करने का रिकॉर्ड : दीक्षित
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश पहला राज्य बना जहां कोरोना महामारी के दौरान सदन की कार्यवाही का सफलता के साथ संचालन किया गया। कार्यवाही में वर्चुअली हिस्सेदारी की व्यवस्था भी पहली बार की गई। तीन दिन के सत्र में 27 विधेयक पारित करने का रिकॉर्ड बना है।
विधायकों की कोरोना जांच का कार्यक्रम बनाया। विधानसभा सचिवालय के सभी कर्मचारियों का भी कोरोना टेस्ट कराया गया। तीन दिन के सत्र में उनके कार्यालय को नियम 56 के तहत 18 सूचनाएं प्राप्त हुईं। इनमें से 10 को सरकार के ध्यान आकर्षित करने के लिए भेज दिया। शेष सूचनाएं अग्राह्य कर दी गईं। नियम 301 में ध्यानाकर्षण की 92 सूचनाएं मिलीं। सभी स्वीकार की गईं। नियम 51 में 102 सूचनाएं स्वीकार की गई। इस दौरान 138 याचिकाएं भी स्वीकृत हुईं।