यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव पर जनसुनवाई के दौरान बिजली ट्रांसमिशन की दरें बढ़ाने का विरोध किया। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनसुनवाई की। इसमें उपभोक्ता संगठनों की ओर से कुल संयोजित भार के मुकाबले ट्रांसमिशन क्षमता में लगभग दो करोड़ किलोवाट के अंतर पर भी सवाल उठाए गए।
पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन की ओर से 2020-21 के लिए दाखिल एआरआर पर नियामक आयोग चेयरमैन आरपी सिंह, सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने जनसुनवाई की। ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ने प्रस्तुतिकरण के जरिये ट्रांसमिशन टैरिफ बढ़ाने की मांग उठाई जबकि उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एआरआर पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन पहले अपना सिस्टम सही करे फिर टैरिफ बढ़ाने की बात करे।
मौजूदा ट्रांसमिशन टैरिफ 18 पैसा प्रति यूनिट को बढ़ाकर 34 पैसा प्रति यूनिट प्रस्तावित किया जाना गलत है। यही नहीं ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन की ओर से बताया गया 4810 करोड़ रुपये का कैपिटल इन्वेस्टमेंट भी बहुत ज्यादा है। वर्मा ने कहा कि फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने में नाकाम ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के कामों पर पिछले दिनों सीएजी नेे भी सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी कि बिना उपयोगिता प्रमाणपत्र लिए ठेकेदारों को 492 करोड़ का भुगतान कर दिया गया जो गंभीर मामला है।
वर्मा ने 3.50 प्रतिशत प्रस्तावित ट्रांसमिशन लाइन हानियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अन्य राज्यों की तरह यह 2.86 प्रतिशत से ज्यादा अनुमोदित नहीं की जानी चाहिए। ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन मौजूदा ट्रांसमिशन टैरिफ में 84 प्रतिशत की वृद्धि चाहता है, लेकिन जितना लोड है उतनी ट्रांसमिशन क्षमता नहीं है।