एसआर ग्लोबल स्कूल के विक्रम साराभाई प्रेक्षागृह में आयोजित काव्य दोपहरी कार्यक्रम में कवितापाठ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान की ओर से लोकायतन और एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संयुक्त तत्वावधान में विक्रम सारा भाई कन्वेंशन हॉल में मंगलवार को काव्य दोपहरी का आयोजन किया गया। इस दौरान देशभक्ति में घुली रचनाओं के साथ हास्य-व्यंग्य और शृंगार से सजी कविताओं व शायरी का श्रोताओं ने आनंद उठाया।
कवयित्री डॉ. सोनरूपा विशाल ने पढ़ा- कभी आशा थी जन-मन की, कभी अरमान आजादी, जो छीनी शत्रु ने छल-बल से वो पहचान आजादी, लड़ा वीरों ने रण इसको पुन: अपना बनाने में, बनी भारत के अधरों की तभी मुस्कान आजादी। शायर शारिक कैफी ने सुनाया- चुनी वो बस के ज्यादा थीं लड़कियां जिसमें, बिछड़ के तुझसे मैं रोता हुआ नहीं आया। हास्य-व्यंग्य के कवि मुकुल महान ने सुनाया- कोई भी हल कर ले मुझको इतना भी आसान नहीं हूं, मैं सिक्कों में बिकने वाला बाजारू सामान नहीं हूं। कुछ दिन चलकर टूट जाऊंगा, इतना भ्रामक मत सोचो, फौलादी हिंदुस्तानी हूं , चाइनीज सामान नहीं हूं। मालविका हरिओम ने सुनाया- कभी हवाओं में अपनी भी सदा गूंजेगी, अभी तो शोर जमाने का सुन रहे हैं हम। शायर शहबाज तालिब ने पढ़ा- मुहब्बत की जरूरत है खसारा कर लिया जाए, किनारे में भला है तो किनारा कर लिया जाए। इस अवसर पर भाषा संस्थान के निदेशक विनय सिंह और पियूष सिंह चौहान समेत बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
एसआर ग्लोबल स्कूल के विक्रम साराभाई प्रेक्षागृह में आयोजित काव्य दोपहरी कार्यक्रम में कवितापाठ