न्याय व विधि मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि मुजफ्फरनगर कांड में सिर्फ राजनीतिक मुकदमे ही वापस होंगे। इसके अलावा अन्य आपराधिक मुकदमे वापस नहीं लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति द्वेष से दर्ज मुकदमों के अलावा किसी अन्य मुकदमे को सरकार वापस लेने पर विचार नहीं करेगी। वह बुधवार को एनेक्सी स्थित मीडिया सेंटर में राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन की जानकारी देने के दौरान पत्रकारों से बात रहे थे।
मुजफ्फरनगर कांड पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ उन मुकदमों को ही वापस लेने पर विचार करेगी जो मुकदमे सिर्फ राजनीतिक विद्वेष से दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि मुजफ्फरनगर कांड में दर्ज सभी मुकदमे वापस होंगे, जबकि ऐसा नहीं हैं। सरकार ने सिर्फ राजनीतिक मुकदमों को ही वापस लेने की बात कही है।
10 को प्रदेश भर में आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत
न्याय व विधि मंत्री बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर 10 फरवरी को प्रदेश भर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिले से लेकर तहसील स्तर तक किया जाएगा। इस मौके पर सुलह योग्य सभी तरह के लंबित मामलों का निस्तारण मौके पर ही किया जाएगा।
इसमें सुलह होने योग्य आपराधिक मामलों के अलावा दीवानी, राजस्व, पारिवारिक, जलकर, सेवा, वेतन, विद्युत बिल, लेबर, बैंकों से लिए गए ऋण, वाहन दुर्घटनाओं में क्षतिपूर्ति लेने और भूमि अधिग्रहण आदि जैसे विवादों का भी निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अदालतों में लंबित वादों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से प्राधिकरण द्वारा हर साल देश भर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन कराया जाता है। न्याय मंत्री ने कहा कि लोक अदालत में वर्जित सिविल या आपराधिक वादों को छोड़कर अन्य सभी तरह केवादों का निस्तारण मौके पर ही किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर दंगे में केस वापसी की शुरुआत कवाल से हो : मदनी
देवबंद (सहारनपुर)। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के दोषियों से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केस वापसी की दिशा में कदम उठाए जाने को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दो टूक कहा कि यदि सरकार इस मामले में एक पक्षीय कार्रवाई करती है तो यह सरासर नाइंसाफी होगी। यदि दंगे में केस वापसी होती है तो उसकी शुरुआत कवाल से होनी चाहिए। क्योंकि वहां के लोग आज भी कसूरवार न होकर जेलों में सजा काट रहे हैं।