वजह सियासी समीकरण हों या फिर राजनीतिक दलों की मजबूरी, पर महिलाओं को टिकट देने के सवाल पर सियासी दल कठघरे में नजर आ रहे हैं। बीते चालीस सालों में अब तक राजधानी को सिर्फ पांच महिला विधायक ही मिलीं।
कांग्रेस ने चार बार और सपा ने एक बार ही महिला उम्मीदवार पर भरोसा जताया। यह दीगर है कि सियासी दल भले ही उन्हें टिकट देने में कंजूसी बरतें, लेकिन जब-जब महिला उम्मीदवारों पर पार्टी ने भरोसा जताया, उन्होंने निराश नहीं किया और जीत दिलाई।
राजधानी की मौजूदा नौ में पांच सीटों बख्शी का तालाब (पहले महोना), लखनऊ मध्य, सरोजनीनगर, लखनऊ पश्चिम व लखनऊ उत्तर से इन 40 सालों में कोई महिला विधायक नहीं रही है।
इस स्थिति में बदलाव के आसार इस बार भी नहीं हैं क्योंकि प्रमुख राजनीतिक दलों की तरफ से इन नौ सीटों के लिए तय की गई महिला उम्मीदवारों की संख्या चार ही है। यह चारों महिला उम्मीदवार तीन सीटों पर लड़ रही है।
कुल मतदाता : 35 लाख 11 हजार 619 । जिसमें पुरुष मतदाता : 18 लाख 94 हजार 962 और महिला मतदाता 16 लाख 16 हजार 538 हैं। वर्ष 2012 के चुनाव से पहले राजधानी में विधानसभा की आठ सीटें ही हुआ करती थीं।
जिनमें चार कैंट, पूरब, पश्चिम व मध्य शहरी इलाके में थी। इसके अलावा मोहनलालगंज, मलिहाबाद व सरोजनीनगर और महोना सीटें ग्रामीण इलाकों में स्थित थीं। शहरी इलाकों की सीटों की बात करें तो इन 40 सालों में सिर्फ कैंट व पूरब सीट से ही महिला विधायक रही हैं।