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सिर्फ बछिया जन्में देसी गाय, इसके लिए 50 करोड़ खर्च करेगी सरकार

Sat, 26 Jan 2019 12:01 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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cow - फोटो : amar ujala
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प्रदेश में देशी नस्ल की गायों से उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली मादा संतति (बछिया) पैदा करने की योजना अब अमली रूप ले सकेगी। शासन ने वर्गीकृत वीर्य (सेक्स सॉर्टेड सीमेन) के उपयोग की योजना के लिए शासन ने 49.75 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। ग्लोबल टेंडर के जरिये स्वदेशी गोवंश के सेक्स्ड सॉर्टेड सीमेन का उत्पादन किया जाएगा। इससे देसी गायों में कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा।

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देसी गोवंश को बढ़ावा देने तथा निराश्रित पशुओं की समस्या के समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने सेक्स सॉर्टेड सीमेन के उपयोग की महत्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की है। ग्लोबल टेंडर प्रक्रिया से चयनित संस्था द्वारा बाबूगढ़ (हापुड़) स्थित राष्ट्रीय स्तर के प्रजनन केंद्र में वर्गीकृत वीर्य उत्पादन इकाई की स्थापना की जाएगी। वहां से सेक्स्ड सॉर्टेड सीमने विभिन्न जिलों को भेजा जाएगा। इससे गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। तीन जिलों में ट्रायल के दौरान इसकी कामयाबी 90 फीसदी रही थी। यानी सेक्स सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराने पर 10 में 9 गायों ने बछिया को ही जन्म दिया। पिछले महीने कैबिनेट से मंजूरी के बाद शासन ने इस योजना के लिए 49.75 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं।

बुंदेलखंड में 100, अन्य जिलों में 300 रुपये लेवी
प्रमुख सचिव पशुधन डॉ. सुधीर एम बोबडे ने बताया कि यह योजना सभी 75 जिलों में लागू की जाएगी। सेक्स्ड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान के लिए पशुपालकों से बुंदेलखंड में 100 रुपये और अन्य जनपदों में 300 रुपये लेवी के रूप में लिए जाएंगे। योजना के तहत पशुओं की टैगिंग, फोटोग्राफी, किट के जरिये गर्भ परीक्षण, उसकी मॉनीटरिंग एवं मादा संततियों (बछिया) की रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी। प्रमुख सचिव ने योजना के लिए 49.75 करोड़ रुपये की स्वीकृति का शासनादेश पशुपालन विभाग के निदेशक प्र्रशासन एवं विकास को भेज दिया है। उन्होंने कहा है कि स्वीकृत की गई धनराशि का एकमुश्त आहरण न करके आवश्यकतानुसार किया जाए।
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यह होगा लाभ
- नर गोवंश (बछड़ों व सांडों) की संख्या में कमी आएगी और निराश्रित गोवंश की संख्या घट जाएगी।
- कृषि फसलों के नुकसान में कमी आएगी।
- पशुओं से हाने वाली सड़क दुर्घटना में कमी आयेगी।
- स्वदेशी नस्ल की गायों का संरक्षण होगा, उनकी संख्या बढ़ेगी। 
- देसी मादा पशुओं से उच्च गुणवत्ता की बछिया पैदा होने से आने वाले सालों में दूध का उत्पादन बढ़ेगा।
- दूध की बिक्री बढ़ने से किसानों व पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।

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