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लखनऊ में ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों से आने वालों में दस फीसदी की ही जांच

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त्रिवेणी नगर का शिवम आईआईटी मुंबई से एमटेक कर रहा है। एक हफ्ते पहले वह ट्रेन से लौटा, लेकिन स्टेशन पर उसकी जांच नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ज्यादा संक्रमण वाले राज्य से आने वाले शिवम का कोई डाटा भी नहीं लिया।
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मुंबई से लौटे गोमतीनगर के राम निवास को चारबाग स्टेशन पर सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग के बाद जाने दे दिया गया। उनकी कोई जांच नहीं हुई और न ही कोई डिटेल ली गई। निगरानी समिति ने भी उनकी कोई रिपोर्ट कमांड सेंटर में नहीं मुहैया कराई है।
वेब सीरीज की शूटिंग के लिए मुंबई से टीम सड़क मार्ग से लखनऊ आई। किसी भी टोल प्लाजा पर मुंबई की गाड़ियां देखने के बाद भी जांच नहीं हुई। गोमतीनगर के जिस होटल में टीम ठहरी थी, उसकी ओर से स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी गई। जांच में इनमें से पांच पॉजिटिव निकले। इनमें से तीन फ्लाइट और दो ट्रेन से आए थे, लेकिन इनकी एयरपोर्ट व स्टेशन पर जांच नहीं हुई थी।
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स्वास्थ्य विभाग भले ही मुंबई समेत ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों से आने वालों की निगरानी का दावा कर रहा हो, लेकिन हकीकत यही है कि इनमें से दस प्रतिशत की ही जांच हो रही है। दिए गए मामले बानगीभर हैं।
ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों से आ रहे यात्री बिना जांच पड़ताल के ही समुदाय में घुल-मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इनमें से केवल उन्हीं को सर्विलांस पर रख रहा, जो संदिग्ध हैं या जिनमें लक्षण मिल रहे। बाकी यात्री बिना जांच कराए बेरोकटोक घूम रहे हैं। निगरानी समिति भी इन्हें ट्रेस नहीं कर पा रही है।
आरोप है कि निगरानी समिति की ओर से सिर्फ दवाओं का वितरण मरीजों के घर पर हो रहा है। ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों से आने वाले किसी भी यात्री के बारे में अभी तक इसने कोई रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराया है। यह लापरवाही तीसरी लहर की आशंका को बढ़ा रही है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कागजों पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करने का दावा कर रहे हैं।
संदिग्ध या लक्षण वालों की ही जांच
मुंबई से ट्रेनों में रोजाना चार हजार से अधिक यात्री आ रहे हैं। हालांकि, इनमें से 300-400 की ही स्टेशन पर जांच हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास सिर्फ इनका ही रिकॉर्ड है। वहीं, हवाई मार्ग से करीब 400 से अधिक यात्री आ रहे हैं। एयरपोर्ट पर 250 से अधिक जांच हो रही है। बस स्टैंड पर 300 से अधिक की जांच हो रही है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एमके सिंह का कहना है कि सभी यात्रियों की जांच संभव नहीं है। ऐसे में जो संदिग्ध या लक्षण वाले मिलते हैं, उनकी जांच करने के साथ रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
किसी भी टोल पर जांच के इंतजाम नहीं
आगरा एक्सप्रेस-वे, निगोहां, इंटौजा टोल प्लाजा पर अन्य राज्यों से आने वाली गाड़ियों की जांच के इंतजाम अभी तक विभाग ने नहीं किए हैं। ऐसे में यहां के लोग बिना रोकटोक आ रहे हैं। ऐसा तब है जब कई राज्यों ने अपने यहां सख्ती शुरू कर दी है। वे बिना कोविड निगेटिव रिपोर्ट के राज्य में प्रवेश नहीं दे रहे हैं।
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