केजीएमयू की ओपीडी में दिखाने के लिए सही विभाग के चयन की मुसीबत से रोजाना सैकड़ों मरीज जूझते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के समय 78 विभागों की सूची खुलती है।
मेडिकल शब्दावली समझ न पाने के चलते सामान्य मरीज सही विभाग नहीं चुन पाते हैं। गलत विभाग चुनने पर दोबारा पंजीकरण कराना पड़ता है।
कोरोना के चलते चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी के लिए सिर्फ ऑनलाइन पंजीकरण ही हो रहा है। ऑफलाइन पंजीकरण के वक्त संस्थान में कर्मचारी संबंधित व्यक्ति की समस्या सुनकर निर्धारित विभाग में उसका पंजीकरण कर देते हैं।
वहीं, ऑनलाइन पंजीकरण में मरीज को खुद से ही समस्या का आकलन कर विभाग का नाम तय करना होता है। कुछ विभागों को छोड़कर ज्यादातर विभागों के नाम जटिल चिकित्सीय शब्दावली पर आधारित हैं।
इससे कम पढ़े-लिखे और सामान्य मरीज कई बार गलत विभाग की ओपीडी में पंजीकरण करा लेते हैं। लंबी लाइन से पार पाकर जब वे डॉक्टर के सामने पहुंचते हैं तो पता चलता है कि उन्हें दूसरे विभाग में पंजीकरण कराना था।
मरीजों ने बताई समस्या
त्रिवेणीनगर निवासी कपिल गुप्ता को दांत की समस्या है। पंजीकरण के लिए पोर्टल पर दिए गए विभागों के नाम उनकी समझ में नहीं आ रहे हैैं। वहीं, मलिहाबाद निवासी अमरेश कुमार को पेट से संबंधित समस्या है। वे पढ़े-लिखे नहीं हैं। पोर्टल पर विभागों के नाम से वे अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं कि किसमें पंजीकरण कराना है। ऐसे ही अलीगंज निवासी देवेंद्र कुमार को फेफड़े से संबंधित समस्या है। ओपीडी में रेस्पेरेटरी मेडिसिन तथा पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के नाम आ रहे हैं। इनमें से किस विभाग में रिपोर्ट करना है। यह उनकी समझ में नहीं आ रहा है।
फोन की सुविधा पर लाइन रहती है व्यस्त
केजीएमयू में फोन पर भी ओपीडी में पंजीकरण की सुविधा है। पर यह लाइन काफी व्यस्त रहती है। इससे सभी मरीज इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।
सप्ताह में ज्यादातर विभागों की सिर्फ तीन दिन ओपीडी
केजीएमयू में इस समय ज्यादातर विभागों में सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ओपीडी का संचालन ही हो रहा है। इसकी वजह से काफी मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। तीन दिन की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या सीमित रखी गई है। यह व्यवस्था भी मरीजों के लिए मुसीबत वाली है।
विभागों के नाम उनकी विशेषज्ञता के आधार पर ही तय होते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा कोरोना के समय में की गई वैकल्पिक व्यवस्था है। अगर किसी मरीज को समस्या हो रही है तो वे फोन की सुविधा है। इसमें कुछ समय लग सकता है पर इंतजार करने पर समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू