नई व्यवस्था में आम लोगों को उपलब्ध कराई जाने वाली जिन ऑनलाइन सेवाओं में आवेदक को कार्यालय आने की अपरिहार्यता है, उनमें पासपोर्ट, वीजा व ड्राइविंग लाइसेंस की तरह अपॉइंटमेंट तारीख चुनने अथवा पोर्टल से तारीख ऑटो जनरेट करने की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
इसके लिए आवश्यक होने पर एक कटऑफ तारीख तय कर उसके बाद ऑफलाइन जारी होने वाले प्रमाणपत्रों को वैध न मानने के निर्देश जारी करने को कहा गया है। ऑनलाइन आवेदन करने में अक्षम आवेदकों से ऑफलाइन प्राप्त आवेदनों को अपने कार्यालय में ऑनलाइन दर्ज कर आवेदक को सेवा ऑनलाइन ही उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।
इस तरह की गंभीर खामियां
बानगी-1
दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर आवेदक न तो स्वयं अपॉइंटमेंट की तारीख चुन सकता है और न ही पोर्टल की ओर से कोई स्वत: तय होती है। अपॉइंटमेंट की तारीख संबंधित सीएमओ कार्यालय स्तर से पूरी तरह ऑफलाइन माध्यम से तय की जा रही है।
दिव्यांग प्रमाणपत्र से संबंधित सेवा में वाराणसी मंडल के गाजीपुर जिले में 1981 आवेदन मिले हैं। इसी अवधि में उसी मंडल के तीन जिलों चंदौली, जौनपुर व वाराणसी में क्रमश: 6, 4 व 11 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट हो रहा है कि ऑनलाइन के बजाय इन जिलों में ऑफलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं तथा उन आवेदनों को पोर्टल पर दर्ज नहीं किया जा रहा है।
यह भी पता चला कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र को ऑनलाइन बनाने के बाद उस पर हस्ताक्षर मुहर सहित फिर से अपलोड कर जारी किया जा रहा है, जो अनुचित है
बानगी -2
नर्सिंग होम के पंजीकरण से संबंधित सेवा में कानपुर मंडल के कन्नौज जिले में कुल 81 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसी अवधि में कानपुर नगर में केवल 20 आवेदन ही मिले। प्रथमदृष्टया लगता है कि कानपुर व कई अन्य जिलों में ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन मोड में आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं, जिनका अंकन पोर्टल पर नहीं किया जा रहा है।
इसके अलावा निरीक्षण की तारीख पूरी तरह ऑफलाइन व मैनुअल तरीके से तय की जा रही है। इस सेवा के कई आवेदन समयबद्ध निरीक्षण के अभाव में पोर्टल पर अत्यधिक लंबे समय से लंबित हैं। आगरा में एक आवेदन 354 दिनों से लंबित पाया गया।
बानगी-3
चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधी सेवा में आगरा मंडल के आगरा जिले में 2579 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसी अवधि में इसी मंडल के बाकी तीन जिलों में 61 आवेदन ही मिले हैं। स्पष्ट है कि अधिकतर आवेदन ऑफलाइन ही प्राप्त किए जा रहे हैं।
ये महत्वपूर्ण फीचर भी देंगे
- विभाग की ओर से प्रमाणपत्रों को डिजिटल हस्ताक्षर से ही जारी किया जाए।
- विभाग की ओर से जारी किए गए प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन जांच कर सत्यापित करने की व्यवस्था भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए।
- आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए।
आवेदन में मदद के लिए ये जानकारियां पोर्टल पर देंगे
- आवेदन के लिए कौन-कौन से विकल्प हैं? आवेदन के लिए अर्हता व वांछित अभिलेखों की सूची। कोई शुल्क है तो कितना?
- विभागीय सेवाओं के लिए आवेदन पत्र का प्रारूप,
यदि हो।
- आवेदन प्राप्त होने के बाद सेवा देने के लिए चरणबद्ध विभागीय प्रक्रिया का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी)। इसमें आवेदक का एसएमएस, ईमेल के जरिए दी जाने वाली सूचनाएं, विभिन्न चरणों के लिए तय समय सीमाएं आदि।
- विभागों द्वारा सेवा देने के लिए प्रमाणपत्र पत्रों के प्रारूप, जारी करने के लिए अधिकृत अधिकारी आदि।
व्यक्ति व विषय विशेष तक सीधे हो जाएगी सीएम की पहुंच
जनहित से जुड़ी सभी विभागीय सेवाओं व उनकी प्रगति की सूचनाओं को मिशन मोड में मुख्यमंत्री के ‘दर्पण’ डैशबोर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे मुख्यमंत्री किसी संदर्भ विशेष की स्थिति सीधे दर्पण डैशबोर्ड से देख सकेंगे।