दोस्त पुलिस कार्यक्रम के दाैरान छात्राएं
लखनऊ। ऑनलाइन गेमिंग एक ऐसा मुसीबतों का दलदल है, जिसमें फंसे व्यक्ति के परिवार को आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक नुकसान भी होता है। परिवार आर्थिक नुकसान से तो उबर जाता है, लेकिन सामाजिक रूप से हुई हानि की क्षतिपूर्ति करने में काफी समय लगता है। ये बातें शनिवार को हजरतगंज स्थित महिला थाने में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित दोस्त पुलिस कार्यक्रम में एसीपी रजनीश वर्मा ने कहीं। कार्यक्रम में लखनऊ पब्लिक स्कूल की तीन शाखाओं की छात्राएं मौजूद थीं।
एसीपी ने कहा कि आप गेम खेलते-खेलते कब इस दलदल में फंस जाएंगे इसका आपको पता भी नहीं चल सकेगा। एसीपी ने छात्राओं को समझाने के लिए गेमिंग से जुड़े एक मामले का उदाहरण भी दिया। उन्होंने छात्रओं को 1090, यूपी 112 बार और घरेलू हिंसा की भी जानकारी दी। वहीं, महिला थाने की इंस्पेक्टर नीलम ने बताया कि इंटरनेट की दुनिया में अजनबियों से दूर रहना सबसे बड़ी जागरूकता है। अधिकतर साइबर अपराधी महिलाओं और छात्राओं का विश्वास जीत कर उनके साथ ठगी और ब्लैकमेलिंग करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद साइबर सेल में तैनात दरोगा गौरव ने छात्राओं को फेक अकाउंट के बारे में जानकारी दी।
मोबाइल के साथ अपने दिमाग को न होने दें हैक
दरोगा राकेश ने छात्राओं को बताया कि मेलवेयर सॉफ्टवेयर के जरिये साइबर ठग मोबाइल के साथ ही आपके दिमाग को भी हैक कर लेते हैं। वे आपके दिमाग में इतना डर भर देते हैं कि कुछ देर के लिए आप सोचने समझने की शक्ति खो देते हैं। इसलिए उनकी बातों में न आएं। कार्यक्रम में थाना प्रभारी नीलम, दरोगा पूनम व उनकी टीम और स्कूल की जानकीपुरम शाखा से शिक्षिका श्रेया जायसवाल मौजूद रहीं।
दोस्त पुलिस कार्यक्रम के दाैरान छात्राएं
दोस्त पुलिस कार्यक्रम के दाैरान छात्राएं
दोस्त पुलिस कार्यक्रम के दाैरान छात्राएं
दोस्त पुलिस कार्यक्रम के दाैरान छात्राएं