लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने तो अपने यहां प्रवेश और प्रवेशित विद्यार्थियों से संबंधित सभी सूचनाएं ऑनलाइन अपडेट कर ली हैं। मगर कॉलेजों के लिए भी लागू की गई यह व्यवस्था एक साल में ही बंद हो गई। लविवि की तरफ से भी अब तक कॉलेजों को इस संबंध में कोई निर्देश या रिमाइंडर नहीं भेजा गया है। विवि को अब तक यह नहीं पता कि सहयुक्त कॉलेजों में कितने प्रवेश हुए।
इसका असर विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाओं की तैयारियों पर भी पड़ेगा। विवि प्रशासन ने पिछले साल यह व्यवस्था दी थी कि एक निर्धारित समय पर कॉलेज अपने यहां प्रवेशित विद्यार्थियों, उन्हें अलॉट विषयों, उनके ई-मेल व मोबाइल नंबर, कॉलेज को अलॉट इंटेक आदि से संबंधित जानकारी ऑनलाइन यूनिवर्सिटी डेटा रिसोर्स सेंटर (यूडीआरसी) पोर्टल पर अपडेट करेंगे।
कॉलेजों व विद्यार्थियों को विवि की ही तरह लॉगिन आईडी व पासवर्ड जारी किया गया था। इसमें यह भी व्यवस्था थी कि अगर कॉलेज को 60 की इंटेक निर्धारित है तो वह उससे ज्यादा विद्यार्थियों की सूचना भी अपलोड नहीं कर पाएंगे।
अतिरिक्त प्रवेश की पूरी जिम्मेदारी कॉलेज की होगी।
सहयुक्त कॉलेजों में कितने प्रवेश हुए, इसकी जानकारी विवि के पास नहीं
इस कवायद का फायदा यह था कि कॉलेजों की पूरी जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती थी और आगे इसका प्रयोग परीक्षा के लिए किया जाना था। मगर तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके शर्मा की एक आपत्ति के बाद इस पर काफी असर पड़ा था। वहीं नए सत्र 2019-20 में तो इस दिशा में विवि प्रशासन ने कोई कवायद ही नहीं की, जिसका असर ये है कि अब तक सहयुक्त कॉलेजों में कितने प्रवेश हुए, इसकी जानकारी विवि के पास नहीं है। अब सभी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
मुझे नहीं मिला कोई निर्देश
मुझे विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है। मॉड्यूल तैयार है, अगर कोई निर्देश मिलेगा तो इससे जुड़ी कवायद शुरू की जाएगी। - प्रो. अनिल मिश्रा, प्रवेश समन्वयक, लविवि
फुलप्रूफ व्यवस्था कराएंगे
कॉलेजों से संबंधित डेटा को एक जगह पर लाने की प्रक्रिया की जाएगी। यह देखा जा रहा है कि इसमें विद्यार्थियों व कॉलेजों को दिक्कत न आए। व्यवस्था को फूलप्रूफ करके इसे पूरा कराया जाएगा। - प्रो. ध्रुवसेन सिंह, परीक्षा नियंत्रक, लविवि