राजधानी में 50 आढ़तियों का सिंडीकेट आलू और प्याज का रेट बढ़ाने का खेल खेल रहा है। यह सिंडीकेट थोक मंडियों में आलू एवं प्याज की आवक और स्टाक को देखकर रोजाना उसकी कीमत तय करता है।
उपलब्धता कम होने पर सिंडीकेट कीमत बढ़ा देते हैं। दरअसल सिंडीकेट के गोदाम आलू एवं प्याज से भरे पड़े हैं। सिंडीकेट के इस खेल से तीन जुलाई को भी प्याज एक रुपये प्रति किलो महंगा हुआ।
मंडी सूत्रों के मुताबिक आलू एवं प्याज की थोक मंडी दुबग्गा और नवीन सब्जी में 25-25 बड़े आढ़ती कारोबार करते हैं।
यह आढ़ती नासिक, मध्य प्रदेश और राजस्थान से प्याज और लखनऊ के आसपास के जिलों आलू मंगाकर खुदरा कारोबारियों को बेचते हैं। मंडियों में रोजाना 8 से 10 ट्रक प्याज और 50 ट्रक से अधिक आलू की आवक होती है।
आलू थोक मंडी के अलावा कैसरबाग, इंदिरानगर, मुंशी पुलिया, कुर्सी रोड, टेढ़ी पुलिया और बाराबिरवा खुदरा सब्जी मंडी में भी उतरता है।
रमजान शुरू होने से आलू एवं प्याज की खपत बढ़ने एवं कीमत बढ़ने के कारण खुदरा मंडियों के कारोबारी भी एक से पांच कुंतल तक प्याज एवं आलू का स्टाक जुटाए जाने के कारण आढ़तियों के सिंडीकेट ने दोनों के रेट बढ़ा दिए।
सिंडीकेट के द्वारा प्रचार कराया जा रहा कि नासिक में प्याज का अभाव है, जबकि वर्तमान में यह सिंडीकेट राजस्थान और मध्य प्रदेश से प्याज और आलू सीमावर्ती जनपदों से मंगा रहे हैं।
सूत्र बताते कि आढ़तियों के गोदाम और खुदरा कारोबारियों की दुकान में चार से पांच ट्रक यानी 600 से 800 कुंतल प्याज और चार से पांच हजार कुंतल आलू की जमाखोरी की गई है।
आढ़तियों ने आलू एवं प्याज की जमाखोरी करने के लिए मंडी के पास में गोदाम बना रखे हैं। सूत्र बताते कि 3 जुलाई को नासिक से प्याज की आवक घटी तो थोक मंडी में एक रुपये किलो की महंगाई आ गई।
खुदरा कारोबारियों में मुनाफाखोरी
दुबग्गा मंडी के थोक कारोबारी नजमुद्दीन बताते कि आलू एवं प्याज का थोक कारोबार 50 से 100 रुपए प्रति कुंतल के मुनाफा पर हो रहा, लेकिन खुदरा कारोबारियो के द्वारा जमकर मुनाफाखोरी की जा रही है।
एक हफ्ते से दुबग्गा एवं नवीन थोक मंडी में आलू 14-18 रुपए और 20 से 24 रुपए प्रति किलो प्याज बिक रहा लेकिन खुदरा बाजार में आलू 20 से 25 रुपए और प्याज 25 से 30 रुपए प्रति किलो बेंच रहे।
ये कारोबारी आलू पर 6 से 7 और प्याज पर 5 से 6 रुपये मुनाफा कमा रहे। यह मुनाफाखोरी भी महंगाई बढ़ने का कारण है।