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जीएसटीएकवर्ष: राज्य सरकार के खजाने में जबरदस्त इजाफा, 80 फीसदी टैक्स चोरी में कमी

Mon, 02 Jul 2018 12:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
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पिछले वर्ष एक जुलाई को लागू हुए जीएसटी के कारण व्यापारी समुदाय भले ही परेशानी का रोना रो रहा है, लेकिन वैट से जीएसटी में माईग्रेट होने वाले व्यापारियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। प्रदेश में एक साल में करीब 6.50 लाख नए व्यापारियों के जीएसटी में पंजीकरण कराने से टैक्स वसूली में भारी वृद्धि हुई।

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विभागीय सूत्रों की मानें तो जीएसटी के बाद एक साल में पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। साथ ही प्रदेश के टैक्स बेस (टैक्स का आकार) में भी करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उधर, रिटर्न दाखिल करने समेत अन्य कई प्रावधानों के चलते व्यापारियों को परेशानी जरूर झेलनी पड़ रही है।

आर्थिक मंदी, कारोबारियों की नाराजगी और विपक्ष की घेराबंदी जैसे मोर्चों से जूझने के बाद शुरूआती दौर में जीएसटी के बहुत फायदे नहीं दिखे, लेकिन अंतिम 5-6 महीनों में प्रावधानों में संशोधन का असर अच्छा दिखा।
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शुरुआती दौर में रिटर्न दाखिल करने, ई-वे बिल लागू करने समेत अन्य क्रियाकलापों में तकनीकी अड़चनों के चलते राजस्व भी प्रभावित हुआ, वहीं नये व्यापारियों ने जीएसटी में पंजीकरण कराने में हिचक भी दिखाई। बीच-बीच में जीएसटी के प्रावधानों व सिस्टम में किए गए सुधार से एक साल के दौरान राजस्व में वृद्धि भी हुई।

13 लाख हुई व्यापारियों की संख्या

जीएसटी लागू होने से व्यापारियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई। पिछले साल प्रदेश में सिर्फ 7.50 लाख व्यापारी पंजीकृत थे, लेकिन जीएसटी के बाद एक साल में करीब 6.50 लाख नये व्यापारियों ने पंजीकरण कराया। इनमें अधिकांश छोटे व मध्यम श्रेणी के व्यापारी हैं। अब पंजीकृत व्यापारियों की संख्या 13 लाख के करीब है।

80 फीसदी तक टैक्स चोरी में कमी
सूत्रों की माने तो जीएसटी के टैक्स चोरी में करीब 80 फीसदी कमी आई है। इसकी वजह से यह है कि जीएसटी की तकनीक आधारित प्रणाली से व्यापारियों द्वारा किए जाने वाले लेन-देन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है।

20 फीसदी सस्ता हुआ माल ढुलाई
जीएसटी के प्रावधानों से एक से दूसरे राज्य में माल ले जाना आसान होने के साथ किफायती हो गया है। इससे लॉजिस्टक क्षेत्र को फायदा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक ढुलाई की कीमत में करीब 20 फीसदी तक की कमी आई है।
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बड़ा राज्य होने का फायदा भी मिला

आबादी के लिहाज से यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है, इसलिए अन्य राज्यों की तुलना में यहां पर सर्वाधिक उपभोक्ता हैं। चूंकि जीएसटी एक उपभोक्ता आधारित टैक्स प्रणाली है, इसलिए इसके तहत मिलने वाले राजस्व का सबसे अधिक शेयर उसी राज्य को मिलेगा, जहां वस्तुओं का उपभोग करने वालों की संख्या अधिक होगी। इस लिहाज से यूपी को एक साल में करीब 5 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
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