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लेसा की बिजली चोरीः 100 रुपये की बिजली बेच कर वसूल रहे 35 रुपये

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लेसा में सप्लाई की एक तिहाई बिजली चोरी, लेसा सिस गोमती में 65 फीसदी लॉसेस के जिम्मेदार इलाकाई इंजीनियर डटे
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यूपी पावर कॉर्पोेरेशन लेसा के सिस एवं ट्रांसगोमती जोन को हर माह जितनी बिजली सप्लाई करता है, उसकी एक तिहाई चोरी हो रही है।
यह चुनिंदा खंडीय इलाकोें में हो रहा है। ऐसे खंडों का एग्रीगेट टेक्निकल कॉमर्शियल लॉसेस (एटीएंडसी लॉसेस) 65 फीसदी तक है, पर इसमें बिजली चोरी के आंकड़े का कोई जिक्र नहीं है। बल्कि इसे समग्र तकनीकी वाणिज्यिक क्षति का नाम दिया गया है।
उधर, जिन इलाकाई इंजीनियरों की लापरवाही से पावर कॉर्पोरेशन की रकम डूब रही है, वे सभी डटे हैं। बड़े अफसरों ने कई को लेसा से बाहर स्थानांतरित करने की संस्तुति की, पर कुछ नहीं हुआ।
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सबसे खराब हालात सेस खंड-दो मोहान रोड, सेस खंड-चार मलिहाबाद, सेस खंड-तीन मोहनलालगंज, चौक और अपट्रॉन खंडों के हैं।
हालांकि, सर्किल-चार के अधीक्षण अभियंता डीके त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें एक माह ही जिम्मेदारी संभाले हुआ और बिजली चोरी पर अंकुश लगाने को अभियान शुरू कराया है।
वहीं, वृंदावन खंड, जिसमें कोई ग्रामीण इलाका नहीं है, वहां भी 41 फीसदी बिजली चोरी, तकनीकी, वाणिज्यिक क्षति है।
यहां चोरी हो रही बिजली
उपकेंद्र के सूत्रों ने बताया कि सेस खंड दो एवं तीन में बहुमंजिला वाणिज्यिक इमारतों में बिजली चोरी हो रही है।
इनमें एक से तीन किलोवाट के कनेक्शन दिखाने के लिए दिए और सीधे पोल से बिजली चोरी की जा रही है। ये इलाके पारा, मोहान रोड, काकोरी मोड़, सरोसा, आलमनगर, हरदोई रोड, दुबग्गा, मोहनलालगंज हैं। यहां प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आंकड़ों का खेल
मुख्य अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक ऐसी बिजली चोरी पर पर्दा डालने को लाइन हानियों के आंकड़ों में खेल करते हैं। खंडीय इलाके में होने वाली बिजली चोरी को बड़े अभियंता तकनीकी लाइन हानि का नाम देते हैं। इनमें वाणिज्यिक हानि को शामिल कर उसे एग्रीगेट टेक्निकल कॉमर्शियल लॉसेस कहते हैं।
17 खंड की हानियां 38 फीसदी से नीचे
लेसा सिस एवं ट्रांसगोमती में 26 वितरण खंड हैं। इनमें 17 की हानियां 38 फीसदी से नीचे हैं। सबसे कम 13-13 फीसदी कानपुर रोड, रहीमनगर, महानगर की हैं। अधिकतर खंडों की लाइन हानियां 18 से 38 फीसदी के बीच हैं। 38 फीसदी हानि यूनिवर्सिटी खंड की है।
औसतन 38 फीसदी लोग भर रहे बिल
लेसा के ट्रांसगोमती के बीकेटी खंड में जुलाई में औसतन 100 उपभोक्ताओं के बिजली बिल जारी किए गए। इनमें से महज 38 लोगों ने इसे भरा। बीकेटी में जुलाई में कुल 63,344 उपभोक्ताआें के बिल बनाए गये, जिसमें से 24,045 ने बिल को जमा किया है। इस कारण यहां थ्रू रेट 4.51 रुपये प्रति यूनिट है।
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लापरवाहों पर कार्रवाई होगी
प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ, संजय गोयल ने बताया कि बिजली चोरी, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों की समीक्षा चल रही है। जिन खंडों में 65 फीसदी तक हानियां है, वहां होने वाली बिजली चोरी के खिलाफ अभियान मुख्यालय की टीम से चलाया जाएगा।
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