लखनऊ। चिन्मय मिशन लखनऊ की ओर से पांच दिवसीय ज्ञान यज्ञ में पहले दिन ब्रह्मचारिणी शाश्वती चैतन्य ने कहा कि साधक को निरंतर अभ्यास से स्वयं को शरीर न मानकर चेतन आत्मा ही मानना चाहिए। यह बिना ज्ञान और अविद्या के नाश के बिना संभव नहीं है।
शाम के सत्र में गीता के भक्तियोग नामक बारहवें अध्याय पर प्रवचन करते हुए ब्रह्मचारिणी शाश्वती चैतन्य ने कहा कि अर्जुन भी हम संसारियों की भांति मानसिकता से ग्रस्त होकर अपनी और संबंधियों की समस्याएं कहता है। भगवान कृष्ण ने भी तभी गीता का ज्ञान देना शुरू किया, जब उन्होंने देखा कि अर्जुन ने पूरी तरह से शिष्यत्व ग्रहण कर पात्रता प्राप्त कर ली है।