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मेयो हॉस्पिटल में पैसों के लिए मरीज को बनाया बंधक!

Thu, 08 Jan 2015 12:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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गोमतीनगर के मेयो अस्पताल में न्यूरो मरीज के परिवारीजनों ने बंधक बनाने का आरोप लगाया है। मरीज के परिवारीजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर और संचालक मरीज का जबर्दस्ती इलाज कर उसका बिल बढ़ा रहे हैं, जबकि मरीज की हालत सुधर नहीं रही है।
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इलाज के लिए उसके खेत, बाग और रोजी रोटी का साधन गिरवी रख तीन लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए कहा तो अस्पताल प्रशासन ने वेंटिलेटर फीस के नाम पर और ढाई लाख रुपये की मांग कर दी। इसके बाद परिवारीजनों ने मामले की शिकायत प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सीएमओ से की।

आनन-फानन में सीएमओ के आदेश पर एसीएमओ मौके पर पहुंचे और तीमारदारों से मामले की लिखित शिकायत लेने के बाद मरीज को छोड़ने के लिए कहा। परिवारीजनों ने मामले की शिकायत गोरखपुर के सांसद महंत आदित्यनाथ से भी की थी, फिर भी अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई।
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अब तक तीन लाख रुपए खर्च

गोरखपुर के सनय की मां अंजना देवी (55) को न्यूरो की समस्या के बाद 30 नवंबर 2014 को कोमा की हालत में गोमतीनगर के मेयो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सनय ने बताया कि यहां डॉक्टरों ने मरीज को वेंटिलेटर पर भर्ती किया।

इलाज और दवा के खर्च के नाम पर दिसंबर के आखिर तक करीब तीन लाख रुपये लिए गए। सनय का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज पर बहुत पैसा लिया, लेकिन बिल सिर्फ दवा का ही दिया।

दवा और इलाज के खर्च से परेशान सनय ने डॉक्टरों से मां को डिस्चार्ज करने को कहा तो डॉक्टरों ने वेंटिलेटर समेत अन्य मदों पर खर्च हुए करीब 2 लाख 80 हजार रुपये की मांग की। पैसा नहीं देने पर मरीज को एक जनवरी को प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 217 नंबर में भर्ती कर दिया गया।

सांसद महंत आदित्यनाथ ने मेयो को लिखा पत्र

सनय का आरोप है कि प्राइवेट में भर्ती करने के बाद इलाज बंद कर दिया गया और पैसे जमा करने के लिए धमकाया जाने लगा। जैसे तैसे दूसरे परिजनों को मामले की जानकारी दी तो उन्होंने गोरखपुर के सांसद महंत आदित्यनाथ को मामले की जानकारी दी। उन्होंने अपने नोट पैड पर छह जनवरी को अस्पताल प्रशासन से मरीज को मुक्त करने के लिए कहा।

सात जनवरी बुधवार को मरीज के परिवारीजनों पर अधिक दबाव बनाया जाने लगा तो दोपहर 12 बजे उसने फोन पर सीएमओ से शिकायत की। फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

सनय ने अस्पताल की मनमानी की शिकायत फोन से प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरविंद कुमार से की। इसके बाद उन्होंने सीएमओ को फोन किया। इस पर हरकत में आए सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. राजेंद्र कुमार और डॉ. अजय कुमार को मौके पर भेजा।

दोपहर साढ़े तीन बजे मेयो अस्पताल पहुंचे एसीएमओ ने मामले की लिखित शिकायत ली इसके बाद मरीज को छोड़ने के लिए कहा और करीब चार बजे वहां से चले गए। इसके बावजूद मरीज को अस्पताल प्रशासन ने छोड़ने से मना कर दिया।

अस्पताल प्रशासन का कहना था कि मरीज के इलाज में जितना पैसा खर्च हुआ है उतना पैसा जमा कराए बिना मरीज को किसी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा।
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मरीज के बेटे को थाने ले गई पुलिस

मेयो अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों ने मरीज के बेटे सनय को धमकाने के लिए पुलिस का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
परिवारीजनों से मिली जानकारी के मुताबिक एसीएमओ की टीम शाम पांच बजे अस्पताल से लौटी उसके बाद सादी ड्रेस में एक और वर्दी में दो सिपाही अस्पताल पहुंचे और सनय से गाली गलौच करते हुए पत्रकारपुरम स्थित पुलिस बूथ चलने को कहा।

पुलिस बूथ पर पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने धमकाया कि अगर पैसा नहीं देने पर डॉक्टरों से मारपीट और तोड़फोड़ का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज देने की धमकी दी।

मेयो अस्पताल की संचालिका मधुलिका सिंह का कहना है कि न्यूरो की मरीज अंजना का इलाज एक महीने से अस्पताल में चल रहा है। हालत ठीक होने के बाद उसे वेंटिलेटर से वार्ड में शिफ्ट किया गया है। परिवारीजनों ने पैसा देने में पहले से ही आनाकानी की। शिफ्टिंग के बाद बकाया पैसा 1 लाख 77 हजार रुपये मांगे गए तो मरीज के तीमारदार ने गलत आरोप लगाने शुरू कर दिए।
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