लखनऊ। बढ़ता वायु प्रदूषण, फास्ट फूड और बदलती जीवनशैली बच्चों में एलर्जी के प्रमुख कारण हैं। खानपान और जीवनशैली में बदलाव कर इससे बचा सकता है। फास्ट फूड की जगह पौष्टिक घरेलू भोजन, कोल्ड ड्रिंक के बजाय नारियल पानी, नींबू पानी, सत्तू और छाछ दिया जाए। ये जानकारी केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने दी। वह रविवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में एलर्जी पर आयोजित कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि देश में हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी तरह की एलर्जी से पीड़ित है। इनमें नाक की एलर्जी सबसे आम है। इससे पीड़ित हर तीसरे मरीज को आगे चलकर अस्थमा होने का खतरा रहता है। डॉ. संतोष कुमार ने एलर्जी इलाज में इस्तेमाल होने वाले हिस्टाग्लोबिन इंजेक्शन, एलर्जी टेस्टिंग और इम्यूनोथेरेपी की जानकारी दी। कहा कि अब एक ही व्यक्ति में कई तरह की एलर्जी देखने को मिल रही है। केजीएमयू में सभी तरह की एलर्जी की जांच की सुविधा उपलब्ध है।
लोहिया संस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय वर्मा ने कहा कि बच्चों में त्वचा संबंधी एलर्जी और फूड एलर्जी की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। डॉ. राजीव गर्ग ने नई एलर्जी जांचों के बारे में बताया। डॉ. ज्योति वाजपेई ने बताया कि विभाग में प्रदेश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर संचालित है, जहां मरीजों को निशुल्क योग, प्राणायाम और जल नेति सिखाई जाती है। कार्यक्रम में डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. अंकित कुमार, ईएनटी विभाग के डॉ. वीरेंद्र वर्मा, डॉ. अनुपम मिश्र और डॉ. सुमित शर्मा समेत 100 से अधिक चिकित्सक मौजूद रहे।
कॉन्फ्रेंस में मौजूद चिकित्सक।
कॉन्फ्रेंस में मौजूद चिकित्सक।
कॉन्फ्रेंस में मौजूद चिकित्सक।