नवजात बच्ची की देखरेख करता डॉक्टर
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बेटियों को जन्मते ही फेंक देने की संवेदनहीनता थम नहीं रही। ताजा मामला आशियाना किले के पास का है, जहां कोई महज एक दिन की बच्ची को फेंक गया। अपनों की संवेदनहीनता ने तो उसे मरने के लिए छोड़ दिया, लेकिन गैरों के हाथ उसे सुरक्षा देने को बढ़े। उधर से गुजर रहे एक राहगीर के कदम उसका रोना सुनकर रुक गए। सड़क किनारे पड़ी नवजात को देख उसने 102 पर कॉल कर एम्बुलेंस को बुलाया।
एम्बुलेंस पहुंची और ईएमटी सुनील सचान ने नवजात की हालत देखी। बच्ची की हालत ठीक न पाकर उसे ऑक्सीजन मास्क लगाया गया और उसकी हालत स्थिर बनाए रखने की कोशिश की। इसके बाद वे बच्ची को एम्बुलेंस से लोहिया अस्पताल ले गए। अस्पताल पहुंचने पर उसे चाइल्ड केयर यूनिट में भर्ती कराया गया है। राहगीरों का आरोप है कि एक 18-19 साल की युवती बच्ची को फेंक गई।
वहीं इंस्पेक्टर आशियाना विश्वजीत सिंह का कहना है कि सूचना तो नहीं है। चौकी इंचार्ज को जांच के लिए कहा गया है, जो भी दोषी होगा सजा दी जाएगी। गौरतलब है कि मोहनलालगंज के बेलहनी गांव के पास 13 जुलाई को कोई नवजात बच्ची को फेंक गया था। इस मामले में अज्ञात महिला समेत तीन के खिलाफ केस दर्ज किया। झाड़ियों में मिली बच्ची एक चर्चित निजी अस्पताल के कपड़ों में लिपटी थी। बच्ची को जन्म देने वाली महिला चंडीगढ़ में रहती है।