डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के बिना सामान भेजे ही ट्रांसपोर्ट से करोड़ों रुपये का ई वे बिल लगाकर भुगतान करा लिया गया। यह सब कमीशनखोरी के लिए किया गया। कमीशन के इन रुपये को मैनेज करने के लिए राजस्थान के अलवर की कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस फर्म का प्रयोग किया गया। ट्रांसपोर्ट ई वे बिल में भेजे गये सामानों में ओएमआर शीट, दस्तावेज समेत कई अन्य चीजें दिखायी गई। बिल में दिखाये गये ट्रक उन टोल टैक्स से निकले ही नहीं, जिन टोल प्लाजा की रसीद बिल में लगाई गई है।
एसटीएफ आगरा विश्वविद्यालय में जांच के दौरान ऐसे ही कई सुराग मिले जिसके आधार पर गुड़गांव निवासी अजय जैन को गिरफ्तार किया है। इस साजिश में अभी कई और नाम सामने आने बाकी है। दर्जनों बिल मिले हैं जिनका सत्यापन ही नहीं हो पा रहा है। कई पटल जिम्मेदारों के भी इसमें फंसने की बात सामने आ रही है। एसटीएफ की आगरा में जांच कर रही टीम ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी दी है। संदेह के घेरे में आये ट्रांसपोर्टर, विश्वविद्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों की सूची तैयार हो गई है। उनसे जल्द ही पूछताछ की जाएगी। जब ई वे बिल मिला तो इस फर्जीवाड़े की पोल खुल गई।
एसटीएफ अधिकारी के मुताबिक कई तारीखों को जारी ई वे बिल देखते ही गड़बड़ी की आशंका हुई। जांच में पता चला कि रसीद में जिन ट्रकों के नंबर दिखाए गए हैं। उन ट्रक से सामान ही नहीं आया। ई वे बिल पर दर्ज नंबर ट्रकों के जरूर थे लेकिन जहां से माल की आपूर्ति दिखाई गई। उस निर्धारित रूट के टोल से वे ट्रक गुजरे ही नहीं। दिल्ली से आगरा के बीच टोल प्लाजा से भी ये ट्रक नहीं गुजरे।