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कुलपति पर भ्रष्टाचार के आरोप: कमीशन के रूप में दिए गए थे 73 लाख रुपये, अजय जैन गिरफ्तार

Mon, 07 Nov 2022 05:28 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

कुलपति प्रो. विनय पाठक व करीबी एक्सएलआईसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्रा पर दर्ज वसूली के मामले में अजय जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले में निशाने पर आये विवि के कई कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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छत्रपति साहूजी महराज के कुलपति प्रो. विनय पाठक व करीबी एक्सएलआईसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्रा पर दर्ज अवैध वसूली व बंधक बनाकर पीटने के मामले में एसटीएफ ने रविवार को अजय जैन को गिरफ्तार किया। अजय जैन की कंपनी से अजय मिश्रा की कंपनी के बीच लंबे लेनदेन की डिटेल एसटीएफ के हाथ लगी है। अजय जैन की कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस फर्म और अजय मिश्रा के एक्सएलआईसीटी के बीच 50 से अधिक बड़े लेनदेन का ब्योरा एसटीएफ को मिला है जिसका हिसाब पूछताछ के दौरान अजय जैन नहीं दे सका। वहीं जैन की कंपनी के खाते से कमीशन के रुप में 73 लाख रुपये भी दिये गये। इसकी भी पुष्टि हुई है। इसी आधार पर एसटीएफ ने आरोपी अजय जैन को जेल भेज दिया है।

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एसटीएफ के मुताबिक आरोपी अजय जैन को कुलपति प्रो. विनय पाठक के कमीशन के रुपए मैनेज करने के लिए फर्जी बिल और ई-वे बिल जारी करने के संबंध में पूछताछ के लिए नोटिस दी गई थी। आरोपी से पूछताछ की गई जिसमें एसटीएफ के सवालों के जवाब में वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। एसटीएफ के मुताबिक अजय जैन की कंपनी रजिस्टर्ड है। बावजूद इसके अजय ने भ्रष्टाचार संबंधित रुपयों का लेन-देन किया। फर्जी बिल तैयार कर उन रुपयों का प्रबंधन किया।

कई कर्मचारी व अधिकारियों से होगी पूछताछ
एसटीएफ की जांच का दायरा अब कानपुर विश्वविद्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों तक पहुंच गया है। एसटीएफ के राडार पर छत्रपति साहूजी महराज के कई कर्मचारी आ गये हैं। इनकी सूची भी एसटीएफ के अधिकारियों ने तैयार कर ली है। जल्द ही इन कर्मचारियों व अधिकारियों को एसटीएफ मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के मोबाइल पर एसटीएफ ने संपर्क कर उनको शहर छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है। एसटीएफ के अधिकारी जल्द ही वहां जाकर दस्तावेजों की पड़ताल करेंगे।
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राज्यपाल को छह पूर्व विधायकों ने लिखा था पत्र
प्रो. विनय पाठक के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत छह पूर्व विधायकों ने भी की। इन पूर्व विधायकों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखा। प्रो. विनय पाठक द्वारा बड़े पैमाने पर किये गये भ्रष्टाचार के मामले में जल्द ठोस कदम उठाने और मामले की जांच की ईडी, आईटी और सीबीआई से कराने की मांग की है। पूर्व विधायकों के पत्र के मुताबिक छत्रपति साहूजी महराज विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति व भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के प्रभारी कुलपति प्रो. विनय पाठक इन दिनों भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी के पर्याय बन गये हैं। आरोप लगाया कि प्रो. विनय पाठक ने उच्च शिक्षा मंदिर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी, कोटा की वर्धमान महावीर ओपेन यूनिवर्सिटी, भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा, छत्रपति साहूजी महराज विश्वविद्यायल कानपुर, एकेटीयू, लखनऊ के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य करते हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार किये। इससे विश्वविद्यालयों के कर्मचारी, छात्रों, शिक्षकों व उसके शिक्षा स्तर को काफी हानि पहुंची हैं।

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बिना सामान भेजे ही करा लिया करोड़ों का भुगतान

डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के बिना सामान भेजे ही ट्रांसपोर्ट से करोड़ों रुपये का ई वे बिल लगाकर भुगतान करा लिया गया। यह सब कमीशनखोरी के लिए किया गया। कमीशन के इन रुपये को मैनेज करने के लिए राजस्थान के अलवर की कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस फर्म का प्रयोग किया गया। ट्रांसपोर्ट ई वे बिल में भेजे गये सामानों में ओएमआर शीट, दस्तावेज समेत कई अन्य चीजें दिखायी गई। बिल में दिखाये गये ट्रक उन टोल टैक्स से निकले ही नहीं,  जिन टोल प्लाजा की रसीद बिल में लगाई गई है।

एसटीएफ आगरा विश्वविद्यालय में जांच के दौरान ऐसे ही कई सुराग मिले जिसके आधार पर गुड़गांव निवासी अजय जैन को गिरफ्तार किया है। इस साजिश में अभी कई और नाम सामने आने बाकी है। दर्जनों बिल मिले हैं जिनका सत्यापन ही नहीं हो पा रहा है। कई पटल जिम्मेदारों के भी इसमें फंसने की बात सामने आ रही है। एसटीएफ की आगरा में जांच कर रही टीम ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी दी है। संदेह के घेरे में आये ट्रांसपोर्टर, विश्वविद्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों की सूची तैयार हो गई है। उनसे जल्द ही पूछताछ की जाएगी। जब ई वे बिल मिला तो इस फर्जीवाड़े की पोल खुल गई।

एसटीएफ अधिकारी के मुताबिक कई  तारीखों को जारी ई वे बिल देखते ही गड़बड़ी की आशंका हुई। जांच में पता चला कि रसीद में जिन ट्रकों के नंबर दिखाए गए हैं। उन ट्रक से सामान ही नहीं आया। ई वे बिल पर दर्ज नंबर ट्रकों के जरूर थे लेकिन जहां से माल की आपूर्ति दिखाई गई। उस निर्धारित रूट के टोल से वे ट्रक गुजरे ही नहीं। दिल्ली से आगरा के बीच टोल प्लाजा से भी ये ट्रक नहीं गुजरे।
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