लखनऊ। आवास विकास की संपत्तियों को आवंटित कराकर उसे निरस्त कराने को लेकर फर्जीवाड़ा कर 200 करोड़ रुपये के हेरफेर के मामले में पीजीआई पुलिस को शनिवार को एक और सफलता मिली। इस गिरोह के मास्टरमाइंड जगत नारायाण शुक्ला की बेटी के प्रेमी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, वह भी इस फर्जीवाड़े के खेल में शामिल था। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ कर जेल भेज दिया है।
प्रभारी निरीक्षक पीजीआई धर्मपाल सिंह के मुताबिक, जालसाज प्रॉपर्टी डीलर जगत नारायण शुक्ला ने 12 से अधिक आवासीय व कॉमर्शियल संपत्तियां आवंटित कराई थीं। फर्जी बैंक रसीद लगाकर पैसा जमा कराने का दावा किया। अफसर उन फर्जी रसीदों को आंख मूंदकर पास करते रहे। आवास विकास के कागजों में पैसा आना चढ़ गया। इसके बाद जालसाजों ने आवंटन निरस्त कराकर रिफंड भी हासिल कर लिया। रिफंड देते समय भी जांच नहीं की गई। इस खेल में जगत नारायण शुक्ला के परिवारीजनों के अलावा कई अधिकारी भी शामिल थे जिनके खिलाफ आवास विकास परिषद ने विभागीय कार्रवाई की है। बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध मिली है। उनके खिलाफ भी पुलिस जल्द बड़ी कार्रवाई कर सकती है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, पकड़ा गया आरोपी श्रीनारायण तिवारी उर्फ राज तिवारी मूलरूप से मानिकपुर के सहिजनी प्रतापगढ़ गढ़ी का रहने वाला है। उसके पास से भी पुलिस ने मोबाइल व अन्य सामान बरामद किया है।
जालसाज के बेटी से प्रेम करने की सजा, पहुंचा जेल
पीजीआई पुलिस ने शनिवार को आवास विकास परिषद आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियों के फर्जीवाड़ा के माले में मानिकपुर निवासी राज तिवारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, राज तिवारी दो सौ करोड़ के फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड जगत नारायण शुक्ला की बेटी से प्रेम करता था। उसे यह भी पता था कि आवास विकास परिषद में उसकी प्रेमिका के पिता का काफी रसूख है। राज तिवारी ने भी जगत नारायण से संपत्तियों के खरीद-फरोख्त में मदद मांगी थी।
लखनऊ से गाजियाबाद तक फैला है नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, जालसाजों ने आवास विकास परिषद की वृंदावन कॉलोनी के व्यावसायिक व आवासीय संपत्तियों के अलावा कई मामले में इस तरह के फर्जीवाड़े किए। इस गिरोह का नेटवर्क लखनऊ के अलावा कई जिलों में सक्रिय है। परिषद के जिन बड़े जिलों में कार्यालय हैं, वहां जगत नारायण शुक्ल खुद ही जाता था। वहां के अधिकारियों को मुख्यालय के अधिकारियों से कॉल करवाता था, ताकि उसका काम आसानी से हो जाए। मुख्यालय के अधिकारी संबंधित जिले के अधिकारी को कोड भाषा में सुविधा शुल्क का भी इशारा कर देते थे। अपने इसी रसूख के दम पर जगत नारायण ने आगरा, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा जैसे बड़े जिलों में अपने नेटवर्क को तैयार कर रखा था। इसमें वह अपनी बेटियों, पत्नी, भाई और पत्नी की मदद लेता था।
दस गुना से अधिक देता था रिश्वत
पुलिस के मुताबिक, जगत नारायण शुक्ल सामान्य प्रॉपर्टी डीलरों की तुलना में दस से 15 गुना अधिक रिश्वत देता था। आवास विकास परिषद में हर किसी की जुबान पर था कि जहां पांच सौ रुपये से काम होना होता था, वहां जगत नारायण पांच हजार रुपये खर्च करता था। इसीलिए अफसर उसका काम आसानी से कर देते थे।
लखनऊ की इन संपत्तियों में किया फर्जीवाड़ा
जालसाज गिरोह ने आवास विकास परिषद के लखनऊ स्थित संपत्तियों में हेरफेर कर करोड़ों रुपये डकार लिए थे। इनमें वृंदावन योजना एवरेस्ट एन्क्लेव फ्लैट नंबर ए 1/101, ए 1/304, हिमालय एंक्लेव फ्लैट नंबर ए 1/108, व 1/205 व 11ए/51, 11ए/174, 19बी/348 के अलावा जो व्यावसायिक भूखंड आवंटित हुए उनमें 5सी/6, 5सी/7, 18ए, , 19ए,, 19ए व एस-3 शामिल है। इस मामले केखुलासे के बाद अधिकारियों ने बिना रुपये जमा किए ही संपत्तियों के पक्ष में रिफंड लेकर फर्जीवाड़ा करने के मामले में कहा था कि जो रुपया रिफंड लिया गया, उसकी वसूली की जाएगी। सम्पत्तियों केबदले में रिफंड हो गया, ऐसे में उनके आवंटन का कोई कानूनी अस्तित्व भी नहीं है।