अब "शौर्य और कलंक" जैसे कार्यक्रमों का औचित्य नहीं, आदालत का सम्मान करते हुए सीधे श्रीराम भक्त मंदिर निर्माण करेंगे। सम्पूर्ण राष्ट्र इस पवित्र और स्मरणीय पल की प्रतिक्षा कर रहा है। महंत दास ने कहा "सन् पंद्रह सौ अठ्ठाईस" की क्रिया में "छह दिसंबर की प्रतिक्रिया" हुई अब दोनों तिथियों की पुनरावृति राष्ट्र और समाजहित में नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा श्रीराम जन्मभूमि न्यास द्वारा संचालित मंदिर निर्माण में प्रयुक्त शिलाओंं की नक्काशी कार्य को शीघ्र गतिशील किया जाएगा। हमारी दृष्टि अभी न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार को दिए गए निर्देशों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा अयोध्या के संत धर्माचार्यों में ट्रस्ट संबंधित न्यायालय के निर्देश को लेकर किसी प्रकार का विभाजन नहीं है, वर्तमान सरकार पर सभी को भरोसा है, संत भगवान श्रीराम लला को भव्य मंदिर में विराजमान कराने हेतु एकजुट हैं।