राजभर ने कहा कि गुजरात, बिहार सहित कई राज्यों में शराबबंदी है लेकिन यूपी में मद्यनिषेध व शराब की बिक्री दोनों होती है। उन्होंने लोगों से पूछा कि यहां भी पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए या नहीं? राजभर ने पूछा, आप अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा चाहते हैं या मंदिर-मस्जिद चाहते हैं? एससी-एसटी के बच्चों को मास्टर, सिपाही, एसपी, कलेक्टर बनाने के लिए पढ़ाई, हॉस्टल से कोचिंग तक की सुविधा है लेकिन ओबीसी व सामान्य गरीबों के लिए ऐसी सुविधा नहीं है। भाजपा सरकार का हाल ‘भैंस के आगे बीन बाजे, भैंस करे पागुर’ वाला है।
राजभर ने कहा कि राजनाथ सिंह ने सामाजिक न्याय समिति गठित कर अति पिछड़ों व अति दलितों को हिस्सेदारी दिलाने की पहल की थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 20 मार्च 2018 को दिल्ली में और 11 अप्रैल को लखनऊ में चुनाव के छह महीने पहले हिस्सेदारी दिलाने का वादा किया था, लेकिन चुप्पी साधे बैठे हैं।
छह-छह महीने में बदले मुख्यमंत्री
राजभर ने कहा कि चुनाव एक बार होता है। मायावती, अखिलेश, भाजपा, कांग्रेस किसी की भी सरकार आती है, पांच वर्ष रहती है। एक ही वर्ग के लोग पूरे समय कुर्सी पर रहते हैं। इसलिए हर छह महीने में मुख्यमंत्री बदलना चाहिए। हर जाति के मुख्यमंत्री को मौका मिलना चाहिए।