किताब में लिखा है कि मस्जिद में इस्तेमाल उस मंदिर के एक नहीं सभी 14 खंभों की नक्काशी में हिंदू वास्तुकला और वैदिक काल के प्रतीकों से ऐसा लगता था कि तोड़ा गया मंदिर किसी अत्यंत प्राचीन काल से संबंध रखता था।
मीर बाकी की ओर से बनवाई गई बाबरी मस्जिद किसी बड़े विशाल मंदिर के मलबे पर तामीर की गई थी। अयोध्या में विवादित ढांचे के आसपास हुई खुदाई में मिले विभिन्न प्रमाणों और प्राचीन हिंदू प्रतीकों से यह साफ होता है। यह तथ्य प्रसिद्ध पुरातत्वविद् व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निदेशक केके मुहम्मद ने मलयाली भाषा में लिखित आत्मकथा ''मैं एक भारतीय'' में प्रस्तुत किए हैं।
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उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि मस्जिद में इस्तेमाल उस मंदिर के एक नहीं सभी 14 खंभों की नक्काशी में हिंदू वास्तुकला और वैदिक काल के प्रतीकों से ऐसा लगता था कि तोड़ा गया मंदिर किसी अत्यंत प्राचीन काल से संबंध रखता था। उन्होंने एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में हुई पुरातत्व विभाग की खुदाई की जानकारी सरकार को भी थी, लेकिन किसी ने इस मसले को सुलझाना नहीं चाहा। इस बेबुनियाद विषय को हिंदू-मुसलमानों की प्रतिष्ठा का मुद्दा बना दिया गया।
मुहम्मद कहते हैं कि इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय को भी गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश की गई। सियासी महत्वाकांक्षा के चलते कुछ प्रो. इरफान हबीब और प्रो. रोमिला थापर जैसे इतिहासकार ये नहीं मानना चाहते थे कि वे सिर्फ और सिर्फ इतिहासकार हैं। जबकि हम पुरातत्व वैज्ञानिकों से बेहतर इतिहास का गवाह कोई और हो ही नहीं सकता है। विश्व के किसी भी मुल्क के पुरातत्व वैज्ञानिकों से यदि अयोध्या के विवादित स्थान की फिर से जांच कराई जाए तो नतीजा यही निकलेगा कि वहां की मस्जिद किसी ऐतिहासिक मंदिर को गिराकर बनवाई गई थी।