रिकॉर्ड में मृत घोषित एक बुजुर्ग आरटीआई एक्ट की मदद से फिर जिंदा हो गया। रामपुर के इस बुजुर्ग की जमीन हड़पने के लिए कुछ लोगों ने चकबंदी विभाग की मिलीभगत से यह साजिश रची थी। राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में संबंधित जनसूचना अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, आयोग के आदेश पर चकबंदी विभाग ने रिकॉर्ड में पुन: बुजुर्ग का नाम दर्ज कर दिया है।
रामपुर की तहसील बिलासपुर के गांव डिबडिबा में बुजुर्ग मलखान सिंह के नाम कई बीघा जमीन थी। उनके जानने वाले कुछ लोगों ने चकबंदी विभाग के रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखा दिया। पता चलने पर बुजुर्ग ने अफसरों के यहां खूब चक्कर लगाए, लेकिन राहत नहीं मिली।
थक-हार कर उन्होंने चकबंदी अधिकारी, बिलासपुर से आरटीआई एक्ट के तहत पूछा कि डिबडिबा में मलखान सिंह पुत्र लेखराज के नाम कुल कितनी जमीन दर्ज है। सूचना न मिलने पर मलखान ने राज्य सूचना आयोग में अपील की। वादी ने आयोग को बताया कि चकबंदी विभाग ने जमीन हड़पने के लिए उन्हें मृत घोषित कर दिया है।
राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने रामपुर के डीएम को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए और 30 दिन में रिपोर्ट मांगी। बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी डीएन पांडेय ने आयोग में पेश होकर बताया कि इस मामले में पूर्व में पारित सहायक चकबंदी अधिकारी का आदेश निरस्त कर दिया गया है। खाता संख्या-196 के गाटा संख्या 191 पर रकबा 0.230 हेक्टेयर जमीन मलखान के नाम दर्ज कर दी गई है। वादी ने भी आयोग को बताया कि उन्हें जमीन वापस मिल गई है।