इसमें शरीर को फायदा पहुंचाने वाला ओमेगा थ्री तत्व सबसे ज्यादा होता है। साथ ही ये दिल को नुकसान पहुंचाने वाले ओमेगा सिक्स के स्तर को भी नियंत्रित रखता है।
यह जानकारी एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रो. एस.के. मिश्रा ने दी। मौका था बुधवार को केजीएमयू के कम्यूनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ विभाग के 56वां स्थापना दिवस का ।
आगरा मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ विभाग के हेड प्रो. एस.के. मिश्रा ने कहा कि खाना पकाने के लिए तेल के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए।
अलसी के तेल में ओमेगा-3 अधिक होता है। ये अन्य तेलों से मिलने वाले ओमेगा सिक्स के स्तर को बराबर करता है। कुछ लोग खाने में अलसी का तेल दिन में एक बार जरूर इस्तेमाल करते हैं।
प्रो. मिश्र ने जानकारी दी कि बाजार में बिक रहे तेल में फैट, ओमेगा थ्री और सिक्स के स्तर को जरूर देखना चाहिए।
उसमें पूफा (पीयूएफए-पॉली अनसेच्युरेटेड फैटी एसिड) और मूफा (एमयूएफए-मोनो सेच्युरेटेड फैटी एसिड) का अनुपात देखें।
इसके बाद तय करें कि कौन सा खाद्य तेल आपके लिए सही रहेगा। उन्होंने बताया कि जो खाद्य तेल इस्तेमाल किया जाए उसमें सेच्युरेटेड फैट की मात्रा 10 फीसदी से कम होनी चाहिए।
इसके अलावा पूफा-मूफा का स्तर चार अनुपात एक से अधिक नहीं होना चाहिए। यही नहीं, खाद्य तेल में ओमेगा थ्री और सिक्स का स्तर एक अनुपात चार से अधिक नहीं होना चाहिए।
प्रो. मिश्रा ने बताया कि खाद्य तेलों का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। यदि सुबह सरसों का तेल का इस्तेमाल किया गया है तो शाम को किसी और तेल से खाना पकाना चाहिए।
इस मौके पर केजीएमयू के वीसी प्रो. डी.के. गुप्ता, कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. उदय मोहन, डॉ. नईम अहमद, डॉ. ओपी सिंह, एस.ए. अब्बास मौजूद थे।