लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए जिला प्रशासन अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमें गठित करने का निर्णय लिया गया। ये टीमें सोमवार से राजधानी के 97 निजी विद्यालयों का दौरा कर आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगी।
जिलाधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विकास खंड में एसीएम और खंड शिक्षा अधिकारी की संयुक्त टीम बनाई जाए। ये टीमें संबंधित निजी विद्यालयों में जाकर स्कूल प्रशासन और अभिभावकों से बातचीत करेंगी तथा प्रवेश में आ रही बाधाओं की जांच करेंगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि चयनित बच्चों को हर हाल में समय पर प्रवेश दिलाया जाए।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि राजधानी के कई प्रमुख निजी विद्यालयों के खिलाफ अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई है। इनमें सीएमएस, जयपुरिया, टीपीएस, एलपीएस और एसटीडी हॉल सहित अन्य स्कूल शामिल हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देने में लापरवाही बरत रहे हैं। विभाग की ओर से इन स्कूलों को नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष इन मामलों को रखा गया, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को स्कूलों में जाकर सीधे अभिभावकों और प्रबंधन से बातचीत करने के निर्देश दिए। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरटीई के तहत चयनित किसी भी बच्चे का प्रवेश लंबित न रहे।
150 से अधिक विद्यालयों के खिलाफ शिकायत
राजधानी के करीब 1600 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। अब तक लगभग 13 हजार बच्चों को प्रवेश मिल चुका है, जबकि चार हजार से अधिक बच्चे अभी भी प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं। प्रवेश न देने वाले 150 से अधिक विद्यालयों के खिलाफ अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार, विभाग लगातार इन विद्यालयों से संपर्क कर चयनित बच्चों को प्रवेश देने के निर्देश दे रहा है।